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छियालेख से आगे जाना है तो परमिट लाओ

Thu, 09 Jul 2015 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
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छियालेख से उस पार बसे गांव के लोगों पर अब आईटीबीपी की अग्रिम चौकियों में तैनात जवान इनरलाइन परमिट लाने के लिए दबाव बनाने लगे हैं। हालांकि इस बाबत स्थानीय प्रशासन के पास कोई लिखित आदेश नहीं आया है। छियालेख में इनरलाइन है। वहां से आगे के क्षेत्र को बार्डर के कारण प्रतिबंधित क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है। छियालेख से आगे जाने वाले बाहरी लोगों को एसडीएम से इनरलाइन परमिट बनाना पड़ता है, लेकिन स्थानीय लोग ग्राम प्रधान की ओर से जारी प्रमाणपत्र और वोटर आईडी दिखाकर इनरलाइन पार करते रहे हैं।
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छियालेख के बाद तिब्बत सीमा की तरफ गर्ब्यांग, गुंजी, नपलच्यू, बूंदी, कुटी, नाभी और रौंगकांग गांव पड़ते हैं। पिछले कुछ दिनों से छियालेख अग्रिम चौकी में तैनात जवान स्थानीय लोगों से इनरलाइन परमिट की मांग करने लगे हैं। पिछले दिनों इस क्षेत्र के भ्रमण पर गई जिला पंचायत सद्य मंजुला बुदियाल और उनके पति महेंद्र बुदियाल को भी इस समस्या का सामना करना पड़ा।

बुदियाल ने बृहस्पतिवार को एसडीएम को पत्र देकर इनरलाइन परमिट की मांग को गलत बताया। उन्होंने इस बाबत आईटीबीपी के महानिदेशक को भी पत्र भेजा है। एसडीएम एके पांडे ने कहा कि अभी तक उनको आईटीबीपी के अधिकारियों की ओर से इस आशय का न तो कोई पत्र मिला है और न कोई आदेश ही जारी हुआ है। स्थानीय लोग पहले की तरह कुछ प्रमाण दिखाकर इनरलाइन पार कर सकते हैं।
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क्या है इनरलाइन
तिब्बत सीमा तक खुलेआम प्रवेश की अनुमति किसी को नहीं दी जाती। 1962 में इनरलाइन जौलजीबी में रखी गई थी। तब धारचूला जाने के लिए भी इनरलाइन परमिट बनाना पड़ता था। वर्ष 2000 में इनरलाइन को जौलजीबी से छियालेख शिफ्ट कर दिया गया। अब छियालेख से आगे कोई ट्रैकर, पर्यटक या अन्य लोग जाना चाहें तो उनको धारचूला के एसडीएम से परमिट बनाना पड़ता है। परमिट में उस क्षेत्र में जाने का मकसद और क्षेत्र में रहने की अवधि का उल्लेख भी करना पड़ता है।
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