मदकोट में उफनती गोरी नदी के ऊपर बने तार से नदी पार करता युवक
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मूसलाधार बारिश के दौरान सोमवार को हुए भूस्खलन से बालीबगड़ गांव में रोशनी देवी और पप्पू कुमार के मकान ध्वस्त हो गए, जबकि जोगा राम, गायत्री देवी, फगोती देवी, जमुना देवी, पानुली देवी, गुमानी राम, नंदी देवी, विनोद कुमार के मकानों को खतरा पैदा हो गया है।
वहीं, टांगा के बालीबगड़ को जोड़ने के लिए गोरी नदी पर लोनिवि ने दो पुल बनाए थे, जो सोमवार की बारिश से उफान पर आई गोरी नदी में बह गए। अब दस गांवों को जोड़ने के लिए एकमात्र ट्राली बची है। कुछ युवक जान जोखिम में डालकर इसी ट्राली से आवाजाही कर रहे हैं। जौलजीबी-मदकोट सड़क डौलागाड़ के पास बह गई है। भूस्खलन से गांव में खतरा बना है। इससे भयभीत दस परिवार लोदी में शरण लिए हैं। बालीबगड़ के आपदा प्रभावित परिवार पुल ध्वस्त होने से पहले बंगापानी आए थे। जहां से वह खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी सामान ले गए थे।
ग्रामीणों के पास खाद्यान्न सीमित मात्रा में होने से यदि जल्दी उन्हें सहायता नहीं मिली तो परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तहसीलदार राधेश्याम राणा ने बताया कि जिन ग्रामीणों के मकान ध्वस्त हुए हैं उन्हें अहेतुक धनराशि दी गई है। राजस्व उपनिरीक्षक दुर्गा सिंह मेहरा को क्षेत्र में भेजा गया है। मार्ग ध्वस्त होने के कारण उन्हें बोना तोमिक होते हुए गांव पहुंचने में समय लगेगा। गांव के हालात पर नजर रखी जा रही है। इधर भूस्खलन से बंगापानी क्षेत्र की पेयजल लाइनें ध्वस्त हो गई हैं। लोगों को डेढ़ किमी दूर छोरीबगढ़ से पानी ढोना पड़ रहा है।