पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से सटे देवतगांव में रविवार रात पहाड़ी से फिर बोल्डर गिरे। बोल्डरों की चपेट में आकर जनहानि की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों को रात में ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। अधिकतर ग्रामीणों ने स्थानीय बरात घर में रात गुजारी। स्थिति को देखते हुए डीएम विनोद गोस्वामी ने स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने वैज्ञानिकों की टीम से शीघ्र भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने की बात कही।
देवत गांव की पहाड़ी से बरसात में पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। 18 अगस्त की रात देवत गांव की पहाड़ी से बोल्डर मकान पर गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई थी जबकि पांच लोग घायल हुए थे। इस घटना के बाद से ग्रामीण लगातार भय के साए में रह रहे थे। रविवार की रात फिर से पहाड़ी से गांव की ओर पत्थर गिरे तो ग्रामीण दहशत में आ गए। सूचना मिलते ही दायित्वधारी गणेश भंडारी देवत गांव पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। मुख्यमंत्री धामी ने फोन पर ग्रामीणों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। इसके बाद प्रभावित ग्रामीणों को स्थानीय बरात घर में ठहराया।
सोमवार सुबह जिलाधिकारी विनोद गोस्वामी ने देवत गांव पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ियों से चट्टानों के गिरने का खतरा बढ़ गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित परिवारों को रात्रि में ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के लिए स्थायी आवास व्यवस्था जरूरी है। बरात घर के अलावा अस्थायी तौर पर प्रेशियस अकादमी भवन में उनके लिए रहने की व्यवस्था की गई है। यहां ग्रामीणों को चारपाई, गद्दे, रजाई, बिस्तर, विद्युत, पेयजल और सामुदायिक रसोई की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन लगातार संपर्क बनाए हुए है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद, भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कोमल मेहता, प्रशिक्षु उपजिलाधिकारी आशीष जोशी, वैभव कांडपाल, तहसीलदार विजय गोस्वामी आदि अधिकारी उपस्थित रहे।
पहाड़ी पर अटके हैं कई बोल्डर
शासन के निर्देशों के अनुसार होगा विस्थापन
डीएम गोस्वामी ने कहा कि रात में ग्रामीण बरात घर में रहेंगे। दिन में वे अपने दैनिक कार्य करते रहेंगे। अब तक 20 परिवारों के 80 से अधिक लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था मानसून सीजन तक कर दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों और शासन की नीतियों के अनुरूप प्रभावित ग्रामीणों के स्थायी विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।