गणाईगंगोली क्षेत्र का सीमा काकड़पानी गांव
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पिथौरागढ़-बागेश्वर की सीमा पर बसे सीमा काकड़पानी गांव की दिवाली इस बार भी अंधेरे में ही मनी। ग्रामीण लंबे समय से बिजली, पानी, सड़क की बाट जोह रहे हैं, लेकिन उम्मीदों का दीया अब तक नहीं जल पाया। उपेक्षा से आहत गांव के 130 परिवारों में से 90 परिवार अन्यत्र जा चुके हैं। गांव में रह रहे ग्रामीणों को उम्मीद है कि एक दिन उनके दिन बहुरेंगे और विकास की किरण उन तक पहुंचेगी।
गंगोलीहाट विकासखंड का अंतिम गांव सीमा काकड़पानी अब भी विकास को तरस रहा है। बनकोट के बाद देवराड़ी पंत से पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर ग्रामीण गांव पहुंचते हैं। गांव में कभी किसी के बीमार होने या गर्भवती महिला को अस्पताल लाने के लिए डोली का सहारा है। इसमें भी ग्रामीणों को चढ़ाई और ढलान में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बच्चों को पढ़ाई के लिए रोज 10 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। बच्चों को देवराड़ी पंत स्थित गांधीनगर हाईस्कूल आना पड़ता है। गांव में अब तक बिजली नहीं पहुंची है।
गांव में कभी 130 परिवारों की रौनक थी। सुविधाओं के अभाव में 90 परिवारों ने हल्द्वानी, पिथौरागढ़ और अन्यत्र जाकर घर बना लिए हैं। ग्रामीण मनोज सिंह, गुलाब सिंह ने बताया कि राज्य बने 18 वर्ष हो गए हैं, लेकिन अब तक उनके गांव में विकास की किरण नहीं पहुंची है। ग्रामीणों को बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य के लिए तरसना पड़ता है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से उनके गांव की भी सुध लेने की गुहार लगाई है।
सीमा काकड़पानी गांव में विद्युत पोल लगा दिए गए हैं। एक माह के भीतर गांव में बिजली पहुंच जाएगी।
-मीना गंगोला, विधायक गंगोलीहाट।