मुनस्यारी के बुग्यालों में दिखा वुडकटर पक्षी
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मुनस्यारी के बुग्यालों में बर्ड वाचिंग कैंप का आयोजन कर रही मोनाल संस्था ने दावा किया है कि उसने अब तक क्षेत्र में पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों की खोज कर ली है। सभी पक्षियों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। उनके व्यवहार को भी रिकार्ड करने की कोशिश की जा रही है। मंगलवार को बर्ड वाचिंग कैंप के दूसरे दिन मुख्य रूप से रूफस बैलेड, वूड कटर, यूरोपियन गोल्डफिंच, स्नोवकोक, स्नो पार्टिज, ग्रंडेला, वल्चर, ओरेंजहेडेड थ्रश, कोलटिट, ब्लू कैप रॉक जैसे दुर्लभ पक्षी दिखे। यह सभी पक्षी घने जंगलों और बुग्यालों में रहते हैं। मंगलवार को बलाती फार्म, बेटुलीधार के आसपास बर्ड वाचिंग हुई। इस दौरान प्रतिभागियों ने बुग्यालों में जाकर पक्षियों का दीदार किया।
मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि पक्षियों की पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका होती है। जिन इलाकों में ज्यादा पक्षी मिलते हैं, उससे यह अनुमान लगाया जाता है कि वहां का पर्यावरण सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग इन सुंदर पक्षियों को देखते तो हैं, लेकिन उनके बारे में जानकारी हासिल नहीं करते। कैंप के जरिये पक्षियों के मूल व्यवहार, उनकी संख्या, पक्षियों के प्रजनन काल और उनके आवास-प्रवास की स्थिति का भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।
बर्ड वाचिंग कैंप में शामिल युवा सुनील राणा ने कहा कि इस कैंप के बाद उनका पक्षियों एवं जंगली जानवरों के प्रति नजरिया बदल गया है। वह कहते हैं कि जंगली जानवर और पक्षी हमारे लिए काफी अहम हैं। इस दौरान भूपेंद्र खड़ायत, दान सिंह भंडारी, राजेंद्र बिष्ट आदि ने कैंप में शामिल लोगों को गाइड किया।
कुछ स्थानों पर शिकारी भी सक्रिय दिखे
बर्ड वाचिंग कैंप के दौरान कुछ स्थानों पर शिकारी भी घूमते नजर आए। शिकारी मोनाल जैसे पक्षियों को भी निशाना बना देते हैं। कैंप में शामिल लोगों ने वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी है और तत्काल शिकारियों पर अंकुश लगाने की मांग की है। वन रेंजर लवराज सिंह ने कहा कि वनकर्मियों की टीम को जंगलों में भेजा जा रहा है।