डीडीहाट में नोटबंदी के बाद रुका हुआ एक मकान का काम
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नोटबंदी के बाद की बड़ी भयावह तस्वीर सामने आ रही है। यहां निजी और सरकारी भवनों के निर्माण के लिए बिहार, नेपाल से आने वाले मिस्त्री और मजदूर अब काम नहीं मिलने के कारण लौटने लगे हैं। आठ नवंबर के बाद नए निर्माण कार्य न तो शुरू हो पाए और न पहले से शुरू किए गए काम ही आगे बढ़ पा रहे हैं। नगर क्षेत्र में दस निर्माणाधीन भवन ऐसे हैं, जिनका काम आठ नवंबर से आगे नहीं बढ़ पाया है।
अकेले बिहार के यहां पर 150 मिस्त्री काम करते थे, अब उनकी संख्या मात्र 30 रह गई है। उनके पास भी काम नहीं है। बिहार के मजदूरों के ठेकेदार अफरोज और रवींद्र मंडल ने बताया कि जिन लोगों के मकान बन रहे हैं, वह खुद ही पैसे की दिक्कत में आ गए हैं। यदि भुगतान हो भी रहा है तो वह चेक से किया जा रहा है। वहीं, नेपाल के भी यहां पर 100 से ज्यादा मजदूर काम करते थे। नोटबंदी के बाद इनमें से अधिकांश अपने देश लौट गए हैं।
नेपाल के मजदूरों के ठेकेदार (मेट) खड़क सिंह और गोविंद सिंह ने बताया कि नेपाल के किसी भी मजदूर का भारतीय बैंकों में खाता नहीं है। इस कारण उनको बैंक से भुगतान प्राप्त करना कठिन हो गया है। हालत यह है कि लोगों के पास थोड़ी बहुत जो भी रकम है उसे वह खाने-पीने तथा अन्य आवश्यक काम के लिए बचाकर रख रहे हैं।
मजदूरी के बदले दुकान से उधार राशन
नोटबंदी के कारण हो रही रुपए की कमी से सरकारी ठेकेदार भारी मुसीबत में आ गए हैं। ठेकेदार यूनियन के सचिव हयात सिंह भंडारी ने बताया कि काम पर लगाए गए मजदूरों को देने के लिए नगदी नहीं है। इसलिए मजदूरों को दुकान से उधार में राशन दिलाया जा रहा है। वह कहते हैं कि दुकानदार का उधार बाद में चुकता किया जाएगा। इस समय तो मजदूरों की शाम की रोटी का इंतजाम बहुत जरूरी है।