महाकाली में गिर रहा भूस्खलन के बाद निकला मलबा
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भूस्खलन से प्रभावित खोतिला कस्बे में स्थिति और बिगड़ गई है। लगातार हो रहे भूकटाव से खोतिला की पेयजल लाइन ध्वस्त हो गई है। इस कारण कस्बे में पेयजल संकट गहरा गया है। पिछले चार दिन से लगातार पहाड़ी दरकने का क्रम अभी रुका नहीं है। गांव को जोड़ने वाले दोनों रास्ते टूट गए हैं। अब लोगों को जंगल को पार कर करीब चार किलोमीटर दूरी नापने के बाद धारचूला बाजार पहुंचना पड़ रहा है। इधर, खोतिला के 25 परिवार अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर धारचूला बाजार आ गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि खतरनाक रास्ते से बच्चों को भेजना संभव नहीं है। कुछ परिवारों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।
इधर, यह आशंका जताई जा रही है कि यदि इसी तरह महाकाली में मलबा पटता रहा तो उसका प्रवाह भी बाधित हो सकता है। प्रशासन का कहना है कि अभी भूकटाव हो रहा है, ऐसे में रास्तों और पेयजल योजनाओं की मरम्मत का काम संभव नहीं है। लोगों को सिर्फ सावधानी बरतनी होगी। तहसीलदार आईबी मल्ल ने बताया कि रास्तों पर आवाजाही रोक दी गई है। यह कस्बा धारचूला नगर से सटा है। अक्सर लोगों की यहां आवाजाही बनी रहती है। प्रशासन ने लोगों को सचेत करने के लिए होमगार्ड और पीआरडी के जवान तैनात कर दिए हैं। खोतिला के पास की जमीन पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। यह दरारें धीरे-धीरे खिसक रही हैं। मलबा लोगों के खेतों और नदी में पटता जा रहा है। वहीं, आपदा प्रबंधन विभाग की टीम ने खोतिला का दौरा नहीं किया है। इसे लेकर भी लोगों में गुस्सा है।
2013 से झेल रहे आपदा का दंश
खोतिला के लोग 2013 से आपदा का दंश झेल रहे हैं। भूकटाव को रोकने के लिए महाकाली में जो तटबंध बनाए गए थे, वह भूकटाव को रोकने में सक्षम नहीं हैं। गांव तक आवाजाही के लिए अभी सड़क नहीं है। भूकटाव की आशंका को देखते हुए खोतिला के लिए छह किलोमीटर दूर तपोवन से सड़क का निर्माण शुरू किया गया है, लेकिन लोग इसके विरोध में खड़े हो गए हैं। अब लोग सबसे पहले भूकटाव के संकट से मुक्ति चाहते हैं, ताकि खोतिला को खतरे से बचाया जा सके।