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खासमखास रहे भंडारी की बगावत से जूझ रहे चुफाल

Thu, 09 Feb 2017 10:52 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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डीडीहाट विस क्षेत्र के थल कस्बे में चुनावी समीकरणों पर चर्चा करते लोग - फोटो : अमर उजाला
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राज्य बनने के पहले से डीडीहाट सीट को जीतते आ रहे भाजपा के विशन सिंह चुफाल को कभी खासमखास रहे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष किशन भंडारी की बगावत से जूझना पड़ रहा है। इस सीट पर कांग्रेस भितरघात की आशंका से जूझ रही है। डीडीहाट में भाजपा के चुफाल, कांग्रेस के प्रदीप पाल, उक्रांद के काशी सिंह ऐरी और निर्दलीय किशन भंडारी के बीच मुख्य लड़ाई दिख रही है। इस सीट पर प्रत्याशियों द्वारा एससी, एसटी के साथ ही ब्राह्मण वोटों को रिझाने की कोशिशें चल रही हैं। भाजपा मोदी फैक्टर को भुनाने के प्रयास में है।
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वर्ष 1996 में यूपी काल से डीडीहाट सीट पर काबिज विशन सिंह चुफाल इस बार लगातार पांचवीं जीत के लिए मशक्कत कर रहे हैं। लगातार चार जीत हासिल करने वाले चुफाल को इस बार कांग्रेस और अन्य दलों से अधिक कभी उनके खासमखास रहे किशन भंडारी का तोड़ ढूंढना पड़ रहा है। भंडारी के साथ काफी संख्या में भाजपा का यूथ खड़ा दिख रहा है। भाजपा भंडारी का साथ देने के मामले में पार्टी नेता प्रह्लाद चुफाल समेत कई लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। भंडारी समर्थक परिवर्तन का नारा दे रहे हैं। कांग्रेस में टिकट के 18 दावेदार थे। प्रदीप पाल को टिकट मिलने के बाद से वर्ष 2012 का चुनाव कांग्रेस से लड़ने वाली कांग्रेस नेत्री रेवती जोशी, जगत सिंह खाती आदि दावेदारों की सक्रियता विधानसभा क्षेत्र में दिखाई नहीं दे रही है। एक दावेदार हिमांशु ओझा भाजपा में शामिल हो गए हैं। खीमराज जोशी समेत कई दावेदारों को मनाने का दावा कर कांग्रेस एकजुटता का संदेश देती दिखाई दे रही है, लेकिन टिकट के दावेदारों की नाराजगी कांग्रेस के लिए भितरघात का सबब न बन जाए।

अमर उजाला की टीम जब डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के सुरौली, लेकघाटी, कमतोली, बोकटा, मुवानी, धाराकौली, डुंगरी, सत्यालगांव, थल, देवलथल, सिल, चमू क्षेत्र पहुंची तो वहां मतदाता बंटे नजर आए। अलग-अलग क्षेत्रों में चारों प्रत्याशियों का प्रभाव देखने को मिला। एससी-एसटी के साथ ही ब्राह्मण मतदाता प्रत्याशियों की नजर में हैं। डीडीहाट सीट पर 48 प्रतिशत ठाकुर, 25 प्रतिशत ब्राह्मण, 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 7 प्रतिशत अनुसूचित जाति के वोटर हैं। एससी-एसटी और ब्राह्मण बहुल गांवों में मुखिया के जरिए इस वर्ग में घुसपैठ की कोशिश प्रत्याशी और राजनीतिक दलों के लोग कर रहे हैं।
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ब्राह्मण वोटों को प्राप्त करने की होड़ के पीछे जो एक बात साफ नजर आ रही वह यह है कि कांग्रेस राज्य बनने से पहले से डीडीहाट में ब्राह्मण चेहरे को मैदान में उतारती रही है। इनमें से गोपाल दत्त ओझा, चारुचंद्र ओझा, लीला राम शर्मा जैसे ब्राह्मण चेहरे विधानसभा भी पहुंचे। इस बार कांग्रेस ठाकुर चेहरे के साथ चुनावी समर में है। अन्य दलों ने भी ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं उतारा है।

थलगड़ा निवासी भूपेंद्र कुमार, जलेत निवासी जगदीश कुमार का कहना था कि अब इस एससी वर्ग के लोग भी सोच समझ कर मतदान करने लगे हैं। बलतिर के प्रभु नारायण सिंह, मनोज कुमार, धाराकौली के दान सिंह का कहना था कि प्रलोभन, धनबल के जरिए मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया जाता है।

डीडीहाट में कुल मतदाता-79890
महिला मतदाता-41255
पुरुष मतदाता-38635

डीडीहाट सीट से 6 दावेदार
कांग्रेस-प्रदीप पाल, भाजपा-विशन सिंह चुफाल, यूकेडी-काशी सिंह ऐरी, बसपा-हरगोविंद पंत, निर्दलीय-किशन सिंह भंडारी, विक्रांत पांडे।

अब सजग हो गया है मतदाता
धाराकौली निवासी महेश जोशी कहते हैं कि लोग अपना मन बना चुके हैं। मतदाता अब पहले जैसा नहीं रह गया। राज्य के साथ ही राष्ट्रीय मुद्दों पर भी उनकी नजर रहती है। लोग भले ही मुखर न हों, लेकिन वोट सोच समझ कर ही देते हैं।

मुद्दों का गायब रहना अच्छे संकेत नहीं
डुंगरी निवासी सोहन सिंह मेहता चुनाव से असल मुद्दों के गायब रहने को अच्छा संकेत नहीं मानते हैं। वह कहते हैं कि सड़क, पानी, अस्पताल, शिक्षा जैसे मुद्दों का समाधान काफी पहले हो जाना चाहिए था। अब बात व्यावसायिक शिक्षा, रोजगार सृजन की होनी चाहिए।
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