सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से सड़कों के निर्माण के लिए तैनात की गई कंपनियों के अधिकारी सड़कों के निर्माण के समय पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई नदियों में सड़कों के खुदान के समय निकला मलबा डाला जा रहा है। इससे नदियों का प्रवाह रुक रहा है और बारिश के समय यह तबाही का कारण भी बन सकता है।
बीआरओ इस समय मुनस्यारी-जौलजीबी सड़क के चौड़ीकरण और मुनस्यारी-मिलम सड़क के निर्माण का काम कर रही है। इसके लिए उसने ठेकेदार तथा निर्माण कंपनियों को तैनात किया है। बताया गया है कि जिस समय सड़कों के निर्माण का अनुबंध हुआ उसी समय मिट्टी और मलबा डालने के लिए डंपिंग जोन तय कर दिए गए थे लेकिन इन डंपिग जोन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है। सारा मलबा किरकुटिया, धपुवा, भदेली, गोरी और मंदाकिनी नदियों में पाटा जा रहा है। यह सड़क इन नदियों के किनारे से ही बन रही हैं। क्षेत्र के पर्यावरणविद देवसिंह बोरा ने इस तरह की हरकत को खतरनाक करार देते हुए कहा है कि इससे नदियों का प्रवाह रुक रहा है। नदी के तलों में मिट्टी और मलबा भर रहा है। बारिश के समय यह खतरनाक रूप दिखा सकती हैं। उन्होंने आपदा की दृष्टि से संवेदनशील इस इलाके में पर्यावरण के मानकों की अनदेखी को खतरनाक बताया है। इस मामले में बीआरओ का कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। सभी प्रभावित इलाकों में लोगों ने इस तरह की हरकत पर गहरी आपत्ति जताई है।