प्रख्यात भौतिक शास्त्री और कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति डॉ. डीडी पंत के जन्मशती समारोहों की श्रृंखला के अंतर्गत राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में डीडी पंत स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया।
मुख्य वक्ता पद्मभूषण एवं भूगर्भशास्त्री प्रो. केएस वल्दिया ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और इसकी भूगर्भीय हलचल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने पर्यावरण, पारिस्थितिकी के प्रति संवेदनशील बनें। आईआईटी के पूर्व प्रो. चेयरमैन प्रो. वीके जोशी ने पर्वतीय क्षेत्र के विद्यार्थियों में प्रकृति से नजदीकी होने के कारण अपार क्षमताएं विद्यमान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं और संभावनाओं का उचित उपयोग करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
जीबी पंत विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पीएस महर ने पर्वतीय क्षेत्र में जल संरक्षण एवं संवर्धन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। पाल इंस्टीट्यूट के जैव तकनीकी विभाग के डायरेक्टर प्रो. बीडी लखचौरा ने वर्तमान में जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न अनुप्रयोगों की जानकारी उपलब्ध कराई। इससे पूर्व महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सीडी सूंठा ने आमंत्रित वक्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि प्रो. वल्दिया के महाविद्यालय आगमन से हम गौरवान्वित हुए हैं।
संचालन डॉ. जेएन पंत ने प्रो. डीडी पंत के जीवन, कार्यों का विस्तार से वर्णन किया। डॉ. कामद कुमार द्वारा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इस अवसर पर डॉ. कामद कुमार, डॉ. लल्लन प्रसाद वर्मा, डॉ. आशीष अंशु, डा. एमएस कुटियाल, डॉ. प्रकाश मठपाल, डॉ. पार्वती, डॉ. दीपा पाठक, डॉ. प्रमोद कोठारी, डॉ. कंचन भंडारी, डॉ. धीरज सिंह खाती, डॉ. एलडी मिश्रा, केडी जोशी, पूजा पांडेय, डॉ. मीनाक्षी मेहरा, केसी मिश्रा, कल्पना, बिटटू सिंह, चंद्र प्रकाश, कौशल उप्रेती, योगेश जोशी, रत्नाकर पांडेय समेत छात्र- छात्रा मौजूद रहे।