थल की बरार बिजली परियोजना का नियंत्रण कक्ष
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750 किलोवाट क्षमता की बरार लघु जल बिजली परियोजना डेढ़ वर्ष से बंद पड़ी है। इस कारण 750 किलोवाट बिजली का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
परियोजना में जून 2016 से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है। बरार बिजली परियोजना वर्ष 2012 में उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) को हस्तांतरित की गई थी। ठेकेदारी प्रथा पर यह परियोजना मित्तल कंपनी सहारनपुर ने चलाई। वर्ष 2016 में कंपनी के मालिक की मृत्यु के बाद परियोजना को उनके उत्तराधिकारी ठीक से नहीं चला सके। हाल में कंपनी का अनुबंध समाप्त कर परियोजना को नए सिरे से चलाने के लिए 4 साल के करारनामे के साथ वृक्ष कांट्रैक्टर मेरठ को सौंपा गया।
इस समय कंपनी के टेक्नीशियन की टीम परियोजना की दोनों टरबाइनों की मरम्मत कर रही है। वृक्ष कंपनी के इंजीनियर विनीत कुमार ने बताया कि मरम्मत का काम पूरा हो गया था, किसी ने परियोजना की नहर क्षतिग्रस्त कर दी। नहर की मरम्मत की जा रही है। जल्द ही बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा।
नहर से हो रहा रिसाव
पूर्व में भी बरार परियोजना की नहर क्षतिग्रस्त होने से उत्पादन में बाधा उत्पन्न हुई थी। नहर से हो रहे रिसाव के कारण चौनीपातल और बरड़ के कुछ लोगों के घरों में पानी घुस रहा है। पानी के रिसाव से जमीन खेती लायक नहीं रह गई है। गांव के लोग लंबे समय से रिसाव वाले क्षेत्र में मोटे पाइप बिछाने की मांग कर रहे हैं। यह मांग पूरी नहीं की जा रही है।
गराऊं परियोजना भी ठप
300 किलोवाट की गराऊं लघु जल बिजली परियोजना भी लंबे समय से बंद पड़ी है। वृक्ष कंपनी के इंजीनियर विनीत कुमार का कहना है कि परियोजना की मरम्मत की जा रही है। परियोजना को शुरू होने में कुछ समय और लगेगा।
बरार परियोजना 23 साल पुरानी हो चुकी है। परियोजना की नहर की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही नहर का नए सिरे जीर्णोद्धार किया जाएगा।
-अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक उरेडा