बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी तहसील छह साल से स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति के लिए तरस रहा है। तहसीलदार न होने के कारण लोगों के जरूरी प्रमाणपत्रों को बनाने को मुनस्यारी और धारचूला तहसील की दौड़ लगानी पड़ती है।
एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष विक्रम दानू ने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में फरवरी 2015 में बंगापानी में तहसील स्थापित हो गई थी। स्थापना के छह साल बाद भी बंगापानी तहसील में स्थायी तहसीलदार की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि बंगापानी तहसील का चार्ज कभी धारचूला तो कभी मुनस्यारी तहसीलदार को दिया जाता है। जिस कारण क्षेत्र के लोगों को आय, जाति समेत अन्य प्रमाणपत्र बनाने के लिए धारचूला और मुनस्यारी दौड़ लगानी पड़ती है। उन्होंने आपदाकाल से पहले तहसीलदार की स्थायी नियुक्ति न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। (संवाद)