मूनाकोट (पिथौरागढ़)। बड़ालू क्षेत्र के लोगों को रात में अगर स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी हो जाए तो उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में किसी भी प्रकार का इलाज नहीं मिलता है। इसकी वजह बड़ालू पीएचसी के साथ ही आवासीय भवनों का लंबे समय से जर्जर हाल में होना है जिस कारण कोई भी कर्मी रात में अनहोनी के डर से अस्पताल या फिर आवासीय भवनों में नहीं रुकता है।
ब्लॉक के सबसे बड़े पीएचसी बड़ालू का भवन और आवासीय भवन का निर्माण वर्ष 1977 में हुआ था। वर्ष 2006 में भवन में रंगरोगन हुआ था लेकिन मरम्मत कभी नहीं हुई। इस कारण अस्पताल भवन बेहद जर्जर हाल में पहुंच गया है जबकि आवासीय भवनों की हालत भी ठीक नहीं है। भवनों के कभी भी गिरने के भय से यहां के कर्मचारी रात में अस्पताल और आवासीय भवनों में नहीं रुकते हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों ने इस समस्या को बीडीसी बैठक सहित बड़े अधिकारियों के सामने कई बार उठाई है।
बड़ालू के प्रधान दिवाकर जोशी का कहना है कि इस मामले को वह कई बार बीडीसी बैठक में भी उठा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने अस्पताल भवन को शीघ्र ठीक करने की मांग की है।
बड़ालू पीएचसी पर बड़ालू सहित बगड़तोली, बिषखोली, गैना, किल्ल, गौड़ीहाट, दौली, भटेड़ी, मजिरकाड़ा, लेक, सिरकुच आदि गांवों के ग्रामीणों की स्वास्थ्य का जिम्मा है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में तो इलाज के लिए कहीं भी जाया जा सकता है लेकिन रात में इलाज के लिए दूरदराज जाने में काफी दिक्कत होती है। अस्पताल पास होने के बावजूद रात में इलाज के लिए भटकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि रात में किसी को परेशानी हो जाए तो सुबह का इंतजार करना पड़ता है या फिर रात में ही जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है।
अस्पताल भवन की मरम्मत का कार्य पहले जिला योजना में डाला गया था जो स्वीकृत नहीं हो पाया। अब भवन की मरम्मत का कार्य राज्य योजना में डाला गया है। जल्द धन स्वीकृत होने वाला है। इसके बाद यहां रात में डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ सेवाएं देंगे। -एचएस ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।