केरल और तमिलनाडु की तर्ज पर पिथौरागढ़ जिले के बड़ालू में राज्य का पहला औद्यानिक पर्यटन केंद्र बनेगा। इस औद्यानिक केंद्र की नर्सरियों में पौधे तैयार करने के साथ ही किसानों के लिए ट्रेनिंग कैंप भी आयोजित किए जाएंगे। यहां घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों को फार्म स्टे के तौर पर रेजीडेंसियल सुविधा भी मिलेगी। 70 लाख की लागत से बनने वाले इस औद्यानिक पार्क से हर साल 25 लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है।
पिथौरागढ़ से 15 किलोमीटर दूर स्थित बड़ालू में उद्यान विभाग की तीन हेक्टेअर जमीन है। लंबे समय से बंजर पड़ी इस जमीन में झाड़ियां उग आई हैं। पिथौरागढ़ की मुख्य विकास अधिकारी वंदना की पहल पर अब इस बंजर जमीन का कायाकल्प होने जा रहा है। इस जमीन को एग्रीकल्चर, हाल्टीकल्चर और टूरिज्म कांसेप्ट के आधार पर उपयोग में लाया जाएगा। इस पार्क में पॉलीहाउस बनाए जाएंगे।
यहां नर्सरियों में हाईब्रीड फलों और सब्जियों के चार से पांच लाख पौध हर साल तैयार किए जाएंगे। इन पौधों से हर साल लगभग 20 लाख रुपये की आमदनी का लक्ष्य रखा गया है। इसी केंद्र में जिले के किसानों को खेती, बागवानी और मौनपालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे किसानों को नई तकनीक के प्रशिक्षण के लिए पंतनगर नहीं जाना पड़ेगा। उद्यान में बने पुराने भवनों को हेरिटेज गेस्ट हाउस के रूप में बदला जाएगा।
इन भवनों के जीर्णोद्धार में कंक्रीट के बजाय केवल पत्थर, गारे और लकड़ी का ही इस्तेमाल होगा। इस गेस्ट हाउस में पार्क में घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों को ठहरने की सुविधा मिलेगी। ट्रेनिंग कैंप और पर्यटकों के फार्म स्टे से हर साल पांच लाख रुपये तक की आमदनी होगी। इस तरह बंजर पड़ी उद्यान विभाग की यह जमीन हर साल 25 लाख रुपये तक की कमाई करेगी। सबसे खास बात यह है कि इस औद्यानिक पर्यटन केंद्र का संचालन युवाओं की फेडरेशन के माध्यम से किया जाएगा। बेरोजगार युवाओं का चयन आजीविका परियोजना के माध्यम से किया जाएगा।
- उद्यान विभाग की तीन हेक्टेअर भूमि में औद्यानिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। अक्तूबर तक वित्तीय स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। यह औद्यानिक केंद्र किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ ही बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराएगा। इससे औद्यानिक टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
- वंदना, मुख्य विकास अधिकारी।