पिथौरागढ़। आयुष प्रदेश में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खोले गए आयुर्वेदिक अस्पताल और आयुष विंग डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत लगे शिविर और कलक्ट्रेट में होने वाली जनसुनवाई में लोग आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती की मांग कर रहे हैं। डॉक्टर न होने से लोगों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।
जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर 84 आयुर्वेदिक अस्पताल खोले गए हैं। हैरानी की बात है कि सिर्फ 55 अस्पतालों में ही डॉक्टर तैनात हैं। 29 अस्पतालों में इलाज करने के लिए डॉक्टर नहीं हैं। तीन महीने के भीतर 10 से अधिक डॉक्टरों का स्थानांतरण हुआ लेकिन कोई प्रतिस्थानी जिले को नहीं मिला है। ऐसे में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत लगे शिविरों में लोग डॉक्टरों की कमी को लेकर सवाल पूछ रहे हैं लेकिन कोई भी इसका जवाब नहीं दे पा रहा है।
भागीचौरा क्षेत्र के विक्रम सिंह पोखरिया ने बताया कि अस्पताल में तैनात डॉक्टर का तबादला अन्यत्र होने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को इलाज के लिए डीडीहाट, पिथौरागढ़ के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई तो वह जनता को साथ लेकर आंदोलन करने को विवश होंगे।
फार्मासिस्ट के 23 पद रिक्त
जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में फार्मासिस्ट के 80 पद स्वीकृत हैं। 23 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इन अस्पतालों में फार्मासिस्ट न होने से मरीजों को दवा मिलना भी मुश्किल हो रहा है। वार्ड बॉय अन्य कर्मी मरीजों को दवा देकर किसी तरह काम चला रहे हैं।
कोट
डॉक्टर, फार्मासिस्टों की कमी से कई अस्पतालों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर व्यवस्था की गई है। निदेशालय को पत्र भेज शीघ्र नियुक्ति की मांग की गई है। - डॉ. चंद्रकला भैसोड़ा, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, पिथौरागढ़