एक महीने से बारिश न होने के कारण इस बार गोल गांव में 50 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं, जौ, मसूर की बुआई नहीं हो पाई है। किसान बारिश के इंतजार में हैं, लेकिन फिलहाल बारिश के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। गोल एक ऐसा गांव है, जहां पर 1952 से अब तक सिंचाई की तीन योजनाएं बन चुकी हैं, लेकिन किसी भी योजना से पानी नहीं चल पाया। चौंकाने वाले बात यह है कि सिंचाई विभाग के आंकड़ों में गोल गांव पूर्ण सिंचित दिखाया गया है।
गोल थल घाटी का सबसे उपजाऊ गांव है। यहां पर धान, सोयाबीन, गेहूं, मसूर, जौ, चना की अच्छी पैदावार होती है। गांव के लोगों की मांग पर 1952 में सिंचाई नहर का निर्माण किया गया था। इस नहर से 1996 तक पानी चला। उसके बाद नहर कई जगह क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी पहुंचना बंद हो गया। 2004 में गांव के लिए हाइड्रम योजना का निर्माण किया गया, लेकिन 2005 में यह योजना भी पूरी तरह बंद हो गई।
सरकार ने फिर धन खपाने के लिए 2006 में लिफ्ट सिंचाई योजना की मंजूरी दी। यह योजना बनी तो सही, लेकिन लिफ्ट योजना के घटिया उपकरण लगाने से इसमें भी पानी नहीं चल पाया। गांव के लोग हर बार फसल बोने के लिए बारिश का इंतजार करते हैं। यदि कभी बारिश में देरी हो गई तो फिर फसल की बुआई नहीं हो पाती।
इस बार स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। 24 सितंबर से बारिश नहीं हुई है। अब किसान गंभीर चिंता में हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पीके दीक्षित का कहना है कि सिंचाई नहरों की मरम्मत का प्रस्ताव बनाया जाएगा और बंद नहरों को चालू करने का प्रयास किया जाएगा। इधर, मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि कम से कम इस महीने बारिश की कोई उम्मीद नहीं है।
ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए
गोल निवासी जमन चंद का कहना है कि यदि नहरों में पानी चलता तो बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता। सरकार क्यों योजनाएं बनाती है और क्यों उनका संचालन नहीं होता, यह समझ में नहीं आता। वह कहते हैं कि ऐसे मामलों की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और खराब काम करने वालों से धन की वसूली की जानी चाहिए।
जिले को सूखाग्रस्त घोषित करे सरकार
गोल निवासी किसान जमन नाथ का कहना है कि सरकार पूरे जिले को सूखाग्रस्त घोषित करे और किसानों को मुआवजा दे। इस बार मानसून सीजन में भी अच्छी बारिश नहीं हुई। इसका असर पड़ने लगा है। खेत सूख गए हैं। फसल की बुआई कब होगी, कहा नहीं जा सकता। सिर्फ खेती पर निर्भर लोग गंभीर संकट में हैं।