महाकाली से लाकर बलतड़ी के पास डंप की गई रेत
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भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली से हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए प्रशासन की टीम ने रविवार को छापा मारा और 22 घनमीटर रेत को सीज कर दिया। हालांकि, अमर उजाला में खबर छपने के बाद प्रशासन हरकत में आया था, लेकिन प्रशासन की टीम के मौके से जाने के बाद कानड़ी के पास महाकाली से खनन फिर से शुरू हो गया। रविवार को भी कई ट्रक रेत पिथौरागढ़ की ओर ले जाए गए।
छह माह से महाकाली से अवैध तरीके से कुछ लोग गांव के लोगों के साथ मिलकर रेत का खनन कर रहे हैं। रेत को खच्चरों के माध्यम से बलतड़ी को जाने वाली सड़क तक लाया जाता है। वहां से टिप्परों में भरकर इसे जिला मुख्यालय में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। खनन के कारण नदी में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और नदी का बहाव कानड़ी गांव की तरफ होने लगा है। बताया गया कि खनन को रोकने के लिए अब तक पुलिस की टीम ने एक बार भी मौका-मुआयना नहीं किया।
वहीं, अमर उजाला में खबर छपने के बाद जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने राजस्व टीम को अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर रविवार सुबह नायब तहसीलदार भरत साही, कोटली के राजस्व उपनिरीक्षक नरेश लाल वर्मा, धनोड़ा के राजस्व उपनिरीक्षक भरत मेहता और गौरीहाट के राजस्व उपनिरीक्षक दिनेश कुमार के नेतृत्व में गई टीम ने क्षेत्र में छापा मारा और मौके पर पड़ा 22 घनमीटर रेत को सीज कर दिया। बताया गया कि जैसे ही दोपहर बाद करीब 12.30 बजे राजस्व विभाग की टीम मौके से लौटी तो महाकाली से खनन फिर शुरू हो गया। स्थानीय लोगों का कहना कि खनन करने वालों को किसी का डर नहीं है।