मित्र राष्ट्र नेपाल के बैतड़ी सहित कई जिलों को जोड़ने वाले झूलापुल में लगा डामर उखड़ने लगा है। पुल में डामर डालने के लिए लगे टिन दिखाई देने लगे हैं। जगह-जगह डामर उखड़ने से बारिश के पानी से पुल में लगी लकड़ी की बल्लियां सड़ने लगी है। शीघ्र ही पुल की मरम्मत नहीं होने पर पुल को खतरा हो सकता है।
भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए अंग्रेजों ने झूलाघाट में पैदल पुल बनाया। पुल की मरम्मत का कार्य लोक निर्माण विभाग पिथौरागढ़ द्वारा प्रत्येक चार वर्ष में किया जाता है। इससे पहले 2015 में भी झूलापुल के खराब हो चुकी बल्लियां एवं टिन की मरम्मत करने के बाद पेंट और डामर किया गया था। फिर से पुल का डामर उखड़ने लगा है।
पुल में एक जगह डामर निकलने के बाद टिन दिखने से छेद हो गए हैं। इस पुल से दोनों देशों के सैकड़ों लोग रोज आते जाते हैं। प्रदेश नंबर सात के बैतड़ी, दार्चुला, डडेलधूरा, बझांग, बाजुरा, अछाम एवं डोटी के लोग झूलाघाट, पिथौरागढ़, भारत के विभिन्न शहरों की ओर व्यापार और इलाज के लिए आते हैं।
पुल की मरम्मत के लिए बार्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम के तहत पांच लाख रुपये मिले थे। इससे तीन वर्ष पहले कार्य किया गया। बरसात के बाद मरम्मत का कार्य किया जाएगा।
-नवीन जोशी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि पिथौरागढ़।