जिले की सबसे पुरानी अस्कोट की रामलीला शुरू हो गई है। पहले दिन नटी-सूत्रधार नाटक के साथ ही देवगणों की स्तुति का मंचन किया गया। अस्कोट में वर्ष 1871 से रामलीला हो रही है।
रामलीला की शुरुआत पंडित नारायण दत्त ने विधि-विधान से पूजा कराकर की। इसके पश्चात नटी-सूत्रधार ने रामलीला नाटक की भूमिका सामने रखते हुए गाया-सीता पति रामचंद्र श्रीपति रघुराई। उधर, राक्षसों के आतंक से परेशान देवगण भगवान विष्णु की आराधना करते हुए धरती पर अवतार लेने की प्रार्थना करते हुए गाते हैं-हे दीनबंधु दयासिंधु जगत के पालन हारा। भगवान विष्णु प्रकट होकर देवगणों को जल्द ही पृथ्वी में अवतार लेने की जानकारी देते हैं। देवगण प्रसन्न होकर भगवान की स्तुति करते हैं।
रामलीला का उद्घाटन आईटीबीपी के अवकाश प्राप्त निरीक्षक कृष्णबहादुर पाल ने किया। इस दौरान वक्ता प्रबंधक गोविंद भंडारी, थानाध्यक्ष मोहम्मद आसिफ खान, भीम सिंह भंडारी, हरीश पाल, तनुज पाल, कल्याण चंद, गिरीश रावत, वीरजंग पाल, सुंदर सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष होशियार सिंह पाल ने सभी का आभार जताया।
क्वीटी में रामलीला की तालीम शुरू
नाचनी। क्वीटी में रामलीला की तालीम शुरू हो गई है। तालीम की शुरुआत से पहले रामलीला कमेटी का पुनर्गठन किया गया। खष्टी बल्लभ द्विवेदी को अध्यक्ष, जगदीश चंद्र द्विवेदी को उपाध्यक्ष, राजू मेहरा को सचिव, कुंदन सिंह को कोषाध्यक्ष, नरेश द्विवेदी को संरक्षक बनाया गया है। भवान दत्त द्विवेदी, शोबन बयाल के निर्देशन में कलाकारों को तालीम दी जा रही है।