45 दिन बाद शुक्रवार को जब यहां रसोईगैस के वाहन पहुंचे तो मारामारी शुरू हो गई। कई बार तो स्थिति संभालना मुश्किल हो गया। दो ट्रकों में रसोईगैस के सिलेंडर पहुंचने के बावजूद बेड़ा और बगड़ीहाट गांव के लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पाए। अब इन गांवों के लिए शनिवार को रसोईगैस भेजने का आश्वासन दिया गया है।
अस्कोट से लगे सभी गांवों के लिए रसोईगैस की सप्लाई डीडीहाट गैस एजेंसी से होती है। कुमाऊं में सभी स्थानों पर चल रहे संकट का असर इस इलाके में भी पड़ा है। लोगों ने रसोईगैस का सिलेंडर न मिलने के कारण लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाना शुरू कर दिया है। बार- बार आवाज उठाने के बाद शुक्रवार सुबह जब गैस की गाड़ी पहुंची तो सिलेंडर प्राप्त करने वालों की भीड़ लग गई। लोग सबसे पहले सिलेंडर हासिल कर लेने की जल्दी में थे। उनको आशंका थी कि यदि सिलेंडर समाप्त हो गए तो उनको वंचित होना पड़ सकता है। गैस एजेंसी के प्रबंधक पीएस पोखरिया ने कहा कि जिन गांवों के लोगों को आज सिलेंडर नहीं मिल पाए हैं उनके लिए कल एक वाहन और भेजा जाएगा। आज एक झटके में 440 सिलेंडर खप गए।