पिथौरागढ़। 250 एमएल पानी, एक बिस्कुट के पैकेट के साथ युवाओं को सेना में जाने का सपना पूरा करने के साथ ही रोजगार पाने की जद्दोजहद करनी पड़ी। युवा भूखे-प्यासे भर्ती में दौड़ने का नंबर लगाने रात दो बजे ही मैदान में पहुंचे। भर्ती स्थल में भी उन्हें सिर्फ पानी और बिस्कुट नसीब हुआ और इसी को खाकर उन्होंने 1600 मीटर की दौड़ लगाई।
देश में बेरोजगारी किस कदर हावी है, सीमांत जिले में आयोजित प्रादेशिक सेना भर्ती में यह देखने को मिला है। 411 पदों पर भर्ती के लिए अब तक 25,000 से अधिक युवा विभिन्न राज्यों से 500 से 1000 किमी का सफर तय कर पिथौरागढ़ पहुंचे।
बृहस्पतिवार को भी यूपी के युवाओं की भर्ती हुई। सेना में जाने का सपना पूरा करने के साथ ही रोजगार पाने के लिए युवा अपने ठिकानों से रात के दो बजे ही भर्ती स्थल पहुंच गए। कड़ी मशक्कत के बाद वे दौड़ के लिए नंबर लगाने में कामयाब हुए लेकिन उन्हें भूखे-प्यासे रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
भर्ती स्थल पर पीने के लिए सिर्फ 250 एमएल पानी और खाने के नाम पर मात्र बिस्कुट का एक पैकेट मिला। शाम चार बजे तक प्रादेशिक सेना के लिए भर्ती हुई। रोजगार पाने का लक्ष्य लिए युवाओं ने पानी और बिस्कुट के सहारे ही 1600 मीटर का फेरा लगाया।
कई युवा सफल रहे तो कई युवाओं को निराश होकर लौटना पड़ा। युवाओं ने कहा कि भर्ती स्थल से उन्हें उठने की इजाजत नहीं दी गई तो वह अपनी भूख भी नहीं मिटा पाए। ऐसे में खाली पेट डेढ़ किमी की दौड़ पूरी करना उनके लिए चुनौती बन गया। संवाद
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पेड़ों की छांव में नहीं दिखी धूप, ठंड में ठिठुरते रहे युवा
पिथौरागढ़। भर्ती रैली में शामिल होने के लिए युवा रात दो बजे कड़ाके की ठंड के बीच पहुंचे। सेना ने उन्हें मैदान के बाहर सड़क पर बैठा दिया। सुबह से घने पेड़ों की छांव के बीच उन्हें धूप नसीब नहीं हुई। पूरा दिन ठंड में ठिठुरते हुए युवा अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।
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भर्ती के लिए किया एक हजार किमी का सफर, भर्ती स्थल में फूली सांस
पिथौरागढ़। भर्ती के लिए जिन युवाओं ने 1000 किमी का सफर तय किया, हिमालय के नजदीक हरे-भरे पेड़ों के बीच बने सेना के देवकटिया मैदान पहुंचते ही उनकी सांस फूल गई। दौड़ में असफल युवाओं ने कहा कि मैदान में ऑक्सीजन की कमी से दिक्कत आई। सांस लेने में दिक्कत के चलते वे दौड़ में सफल नहीं हो सके।
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भीड़ अधिक होने से नहीं दौड़े कई युवा
पिथौरागढ़। प्रादेशिक सेना भर्ती में शामिल होने पहुंचे कई युवा भीड़ अधिक होने से नहीं दौड़े और बैरंग घर लौटे। उन्होंने बताया कि एक साथ 300 से 400 युवाओं को दौड़ाया जा रहा है। ऐसे में शुरुआत में पिछड़ने पर वापसी की संभावनाएं नहीं रह जाती। मैदान छोटा होने की वजह से भी कई युवा गिरकर चोटिल हो गए। ऐसे में कई ने भर्ती में शामिल होने से किनारा किया।
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बोले युवा
भर्ती में दौड़ के लिए नंबर लगाने को रात दो बजे भर्ती स्थल पर पहुंच गए। कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पानी और बिस्कुट के भरोसे दौड़ लगाएंगे। खाने के लिए भी बाहर नहीं जा सकते। - ओंकार।
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भीड़ अधिक होने से 400 युवाओं को एक साथ दौड़ाया जा रहा है। ऐसे में खतरा अधिक है। कई युवा चोटिल हो चुके हैं। खतरे को देखते हुए भर्ती में शामिल नहीं होने में ही भलाई समझी। - धर्मेश यादव।
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भर्ती स्थल में पानी और बिस्कुट मिला। सुबह तीन बजे भर्ती के लिए नंबर लगाने पहुंच गया था। बेरोजगारी के सामने भूख और प्यास कुछ नहीं है। नंबर आएगा तो दौड़ लगाउंगा। - उमेश्वर।
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मैदान में ऑक्सीजन की कमी है। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी तो भर्ती में शामिल नहीं हो सके। अपेक्षाकृत काफी छोटे मैदान में प्रादेशिक सेना की भर्ती कराई जा रही है। - सूरज।