ट्रेल पास पर तिरंगा फहराते सेना के जवान
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नंदादेवी और नंदाकोट पर्वतमालाओं के मध्य में 5321 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ट्रेल पास पर तिरंगा फहराने में भारतीय सेना के पर्वतारोहियों ने कामयाबी हासिल की है। सेना के आयुध कोर सिकंदराबाद के छह पर्वतारोहियों ने 19 सितंबर को इस दुर्गम चोटी पर फतह हासिल की। बताया गया कि ट्रेल पास तक पहुंचने में सबसे पहले कामयाबी 1860 में बागेश्वर के सूपी गांव निवासी मलक सिंह को मिली थी। 1926 में इस चोटी तक प्रथम ब्रिटिश कमिश्नर जीडब्लू ट्रेल पहुंचे थे। उनके नाम से ही इसे ट्रेल पास कहा जाता है।
सेना के 15 सदस्यीय अभियान दल ने टीम लीडर कैप्टन चिराग चटर्जी के नेतृत्व में चार सितंबर को बागेश्वर से ट्रेल पास के लिए अभियान शुरू किया। यह टीम बागेश्वर से लोहारखेत, खाती, द्वाली, पिंडारी ग्लेशियर तक पहुंचे। वहां से ट्रेल पास से कुछ दूरी पर आधार शिविर बनाकर उसमें चढ़ने का प्रयास किया। अभियान दल के छह सदस्य इस दुर्गम चोटी तक पहुंचने में कामयाब हो गए। टीम लीडर ने बताया कि अभियान दल के सदस्यों को अंतिम चरण में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पिंडारी ग्लेशियर पहुंचने पर उनका मिट्टी के तेल का डिब्बा गिर गया था। इस कारण भोजन बनाने की समस्या खड़ी हो गई।
अभियान दल के सदस्यों ने चार दिन तक सिर्फ चाकलेट खाकर और पानी पीकर अभियान को पूरा किया। वापसी में यह दल लास्पा, रिलकोट, लीलम होते हुए मुनस्यारी पहुंचा। दल के साथ डॉक्टर सिमरत सिंह भी थे। बताया गया है कि 1860 से अब तक ट्रेल पास के अभियान में 86 दल जा चुके हैं, लेकिन सिर्फ 15 दलों को ही कामयाबी मिल पाई।