जिला मुख्यालय के 27 गांवों के लोगों ने महापंचायत
बुलाकर स्थानीय सेना पर पैमाइशी रास्तों के साथ ही पनघट आदि के रास्तों को
रोकने का आरोप लगाते हुए सेना की ज्यादती का विरोध करने की चेतावनी दी है।
विधायक मयूख महर के आह्वान पर बुलाई गई महापंचायत में विधायक ने नगर के
आसपास के गांवों को किसी भी कीमत में नगर में शामिल न होने देने का ऐलान
किया है। महापंचायत में 27 ग्राम पंचायतों के प्रधान और क्षेत्र पंचायत
सदस्य शामिल थे।
तपस्यूड़ मंदिर परिसर में हुई महापंचायत में ग्राम
प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने एक स्वर से कहा कि सेना की ज्यादती
बढ़ती जा रही है। सेना पैमाइशी रास्तों के साथ ही धार्मिक स्थलों, पनघट
जाने वाले रास्तों में तारबाड़ लगाकर ग्राम वासियों के आवाजाही के मार्ग
बंद कर रही है। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि सेना की कार्रवाई से लोगों
का घरों से निकलना दूभर हो गया है। सेना की ज्यादती को लेकर 27 ग्राम
पंचायतों के लोगों में सेना के प्रति गुस्सा है, जो बड़े आंदोलन के रूप में
सामने आएगा।
विधायक महर ने कहा कि सेना पिछले कई वर्षों से स्थानीय
लोगों के हक-हकूकों को छीन कर उनके साथ ज्यादती कर रही है, जिसके परिणाम
स्वरूप 27 ग्राम पंचायतों के लोग प्रभावित हो गए हैं। विधायक ने कहा कि
सेना की मनमानी के खिलाफ आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है क्योंकि 27 ग्राम
पंचायतों के लोग सेना के व्यवहार से घरों में कैद होकर रह गए हैं।
महापंचायत में पालिका के आसपास के गांवों को पालिका में शामिल करने की
तैयारी का भी मामला उठा। विधायक महर ने कहा कि गांवों को किसी भी दशा में
पालिका में शामिल नहीं होने दिया जाएगा, गांवों का अपना स्वरूप बना रहेगा,
बल्कि उन्हें और विकसित किया जाएगा। तय हुआ कि इस मुद्दे पर 22 नवंबर को
फिर बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।