सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के रिटायर्ड महानिरीक्षक (आईजी) आरसी चिलकोटी का कहना है कि सीमांत में खाली हो रहे गांवों की व्यवस्था सिविल प्रशासन को अपने हाथ में लेनी चाहिए। ऐसे गांवों में सिविल प्रशासन के स्वयंसेवक तैनात किए जाएं जो एसएसबी और आईटीबीपी को गतिविधियों की रिपोर्ट देते रहें। सीमा की सुरक्षा को लेकर चिंतित श्री चिलकोटी ने कहा कि तिब्बत और चीन की सीमा से सटे इस जिले में कई गांव खाली हो रहे हैं। यह गंभीर चिंता का विषय है।
मंगलवार को यहां एक भेंट में उन्होंने कहा कि सिविल प्रशासन को ऐसे खाली गांवों के मकान, खेत और मंदिर अपने संरक्षण में लेने चाहिए। वहां पर हमेशा कुछ न कुछ कार्यक्रम तय किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि वह इस संबंध में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को अपनी राय भेज रहे हैं। बीएसएफ में अपने 40 साल के अनुभव के आधार पर श्री चिलकोटी ने बताया कि घुसपैठिए और आतंकी हमेशा खाली जगह का ही उपयोग करते हैं। कारगिल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां पर आबादी नहीं थी। इस कारण आतंकियों को घुसने में आसानी हुई। वह कहते हैं कि जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की सख्ती के बावजूद घुसपैठ नहीं रुकी है। श्री चिलकोटी ने कहा कि यदि सीमा क्षेत्र में सिविल प्रशासन अपने वालेंटियर तैनात करे तो कई युवाओं को रोजगार मिल जाएगा। साथ ही सुरक्षा के लिए भी यह कदम बेहतर साबित होगा। श्री चिलकोटी 2010 में बीएसएफ के आईजी पद से रिटायर हुए। उनको 1998 में राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा मेडल मिला था।