नोटीफाइड एरिया जौलजीबी करने की मांग को लेकर धारचूला में प्रदर्शन करते लोग।
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शहर में सीवरेज कार्य को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। स्वीकृत लागत से पांच गुना अधिक खर्च होने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। अब पेयजल निगम के अभियंताओं ने निर्माण मंडल के अधीक्षण अभियंता को पत्र भेज सीवरेज योजना के अंतर्गत कार्य की जांच करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि योजना की जांच पूरी होने तक सीवर लाइन का कार्य कराया जाना ठीक नहीं है।
निगम के अधिशासी अभियंता आरएस धर्मशक्तु, सहायक अभियंता आशुतोष उपाध्याय, सहायक अवर अभियंता गंभीर सिंह चौहान, राजीव सैनी और मंडलीय लेखाकार के हस्ताक्षरों से भेजे पत्र में कहा गया है कि सीवरेज योजना के अंतर्गत छोटे छोटे टुकड़ों में 60 से अधिक अनुबंध किए गए थे।
अनुबंध का इंडेक्स प्लान उपलब्ध नहीं है। मास्टर मेनहोल धोबीघाट से ऐंचोली एसटीपी के मध्य 500 एमएम व्यास के सीवर लाइन डालने के लिए वर्ष 2006-07 में मै. बीएचबी कंस्ट्रक्शन से अनुबंध किया गया। कार्य की कुल लागत करीब 8.98 लाख रुपये थी। कहा है कि एसई के छह जुलाई 2007 के पत्र के बाद अतिरिक्त सामग्री के साथ 16.39 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। अनुबंध की पुनरीक्षित लागत 16.39 लाखा रुपये के विरुद्ध शाखा ने बगैर किसी अनुमति के 83.67 लाख रुपये व्यय किए । धोबीघाट मेनहोल से ऐंचोली एसटीपी तक 500 एमएम व्यास की सीवर पाइप लाइन खुले में बिछाई गई है। पिछले कई वर्षों से पाइप लाइन, चैंबर, पिलर ध्वस्त है। इन कार्यों का समरेखण कंप्लीशन प्लान भी नहीं बनाया गया है।