धारचूला (पिथौरागढ़)। गुंजी के मनीला में बीआरओ के 65 आरसीसी की ओसी लेफ्टिनेंट कर्नल भावना ने विभागीय उच्चाधिकारियों और ग्रामीणों के सामने रं समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने भी घटना पर खेद जताया। इस दौरान उन्होंने किसी भी स्थानीय ग्रामीण को कार्य से नहीं हटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का रोष शांत हुआ।
रं समाज के पांच गांवों के लोग तीन दिन से बीआरओ के 65 आरसीसी की ओसी लेफ्टिनेंट कर्नल पर रं समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और स्थानीय लोगों को कार्य से हटाने के विरोध में व्यास घाटी के गुंजी में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को आक्रोशित लोगों ने 10,500 फुट पर स्थित ग्राम गुंजी में कुटी, रोकांग, नाबी, गुंजी और नपलच्यू के सैकड़ों महिला-पुरुषों ने पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल के नेतृत्व में लोगों ने गुंजी से मनीला तक जुलूस निकालकर विरोध-प्रदर्शन किया। जुलूस में बीआरओ की तानाशाही नहीं चलेगी, ओसी वापस जाओ, मजदूर एकता जिंदाबाद के नारे लगाए गए।
स्थिति को देखते हुए बीआरओ के चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी, कर्नल हरीश कोटनाला ग्रामीणों के साथ वार्ता करने रविवार को ही पहुंच गए थे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता की। ग्रामीणों ने ओसी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए माफी मांगने तक आंदोलन समाप्त नहीं करने की चेतावनी दोहराई। इसके बाद बीआरओ के 65 आरसीसी की ओसी लेफ्टिनेंट कर्नल भावना ने विभागीय उच्चाधिकारियों और ग्रामीणों के सामने रं समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
चीफ इंजीनियर विमल गोस्वामी ने भी घटना पर खेद जताते हुए किसी भी स्थानीय ग्रामीण को कार्य से नहीं हटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों का रोष शांत हुआ।इस दौरान कर्नल हरीश कोटनाला, पूर्व चेयरमैन अशोक नबियाल, राजन नबियाल, मदन नबियाल, प्रधान सनम नबियाल, अंजू रोंकली, सुरेश गुंज्याल, सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल, बीडीसी सदस्य प्रियंका गुंज्याल समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
ये था मामला
एक सितंबर को बीआरओ की कमान अधिकारी से मिलने गए ग्रामीणों ने उनके साथ दुर्व्यवहार करने और धार्मिक मान्यताओं को लेकर टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। इसके बाद नाराज लोगों ने गुंजी में ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि बीआरओ स्थानीय ग्रामीणों को काम से निकाल रहा है जबकि बाहरी क्षेत्र से मजदूरों को नोटिफाइड क्षेत्र में लाया जा रहा है।