सैन्य अफसर अंशुल पाठक के साथ माता पिता
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विण निवासी अंशुल पाठक को देशसेवा का ऐसा जुनून सवार हुआ कि उन्होंने गुरुग्राम स्थित मारुति सुजुकी इंडिया से इंजीनियर की नौकरी छोड़ दी और सेना में कमीशन हासिल कर अफसर बन गए। 11 सितंबर को चेन्नई के आफीसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से उन्होंने पासिंग आउट किया और लेफ्टिनेंट बन गए।
प्राथमिक शिक्षा आर्मी स्कूल पिथौरागढ़ से और इंटर की शिक्षा महर्षि विद्या मंदिर से लेने के बाद अंशुल ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से बीटेक किया। बीटेक करते ही उनकी गुरुग्राम में नौकरी लग गई, लेकिन सेना में जाने का उनका जुनून बना रहा। अंशुल के पिता पूरन चंद्र पाठक और माता भारती पाठक पासिंग आउट परेड के समय चेन्नई में मौजूद रहे। अंशुल ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता और विशेषकर सेना में कार्यरत रहे उनके प्रेरणास्रोत त्रिलोचन पांडे को दिया है। अंशुल के सैन्य अफसर बनने पर परिजनों में खुशी की लहर है।