जौलजीबी का वनरावत आवासीय विद्यालय संकट में घिर गया है। वर्ष 2001 से इस विद्यालय की व्यवस्थाओं का संचालन कर रही सीमांत अनुसूचित एवं जनजाति सेवा संस्थान ने शनिवार से इस विद्यालय के संचालन का दायित्व पूरी तरह छोड़ दिया है। संस्था ने इसकी सूचना समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय को भेज दी है। जनजाति कार्य मंत्रालय ही इस विद्यालय के संचालन के लिए फंडिग करता था। दूसरी ओर इस आवासीय विद्यालय को चलाने की तैयारी कर रही दिल्ली की सार्थक प्रयास संस्था के प्रस्ताव को अब तक जनजाति कार्य मंत्रालय से स्वीकृति नहीं मिली है। हालांकि सार्थक प्रयास संस्था के अध्यक्ष उमेश पंत का कहना है कि विद्यालय बंद नहीं होगा और वह अपने संसाधनों से रविवार को एक महीने का राशन एवं अन्य सामग्री विद्यालय में पहुंचाएंगे।
वर्ष 2001 में पूर्व विधायक हीरा सिंह बोरा ने वनरावतों के बच्चों को शिक्षा देने के लिए जौलजीबी में आवासीय विद्यालय की स्थापना की थी। दो वर्ष पहले हीरा सिंह बोरा का निधन हो गया। तब से विद्यालय गंभीर आर्थिक संकट में आ गया। बाद में स्व. बोरा की पत्नी और सीमांत अनुसूचित एवं जनजाति सेवा संस्थान के कोषाध्यक्ष पूरन चंद्र जोशी विद्यालय का संचालन करने लगे। इन लोगों ने राज्य सरकार से 36 लाख 55 हजार 450 रुपये कर्ज लेकर अब तक विद्यालय का संचालन किया। केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्रालय से फंड प्राप्त होते ही उन्होंने राज्य सरकार से कर्ज में ली गई सारी रकम लौटा दी है। साथ ही विद्यालय की जितनी देनदारी, कर्मचारियों का वेतन आदि था उसका भुगतान कर दिया है।
संस्थान के कोषाध्यक्ष पूरन चंद्र जोशी ने बताया कि नए वित्तीय वर्ष से उनकी संस्था अब विद्यालय का संचालन कर पाने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से समय पर धनराशि न मिलने से कई बार गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। ऐसे में अब विद्यालय का संचालन कर पाना संभव नहीं है।
उधर, पिछले दिनों जौलजीबी के आवासीय विद्यालय का संचालन करने का प्रयास कर रही दिल्ली की सार्थक प्रयास संस्था को अब तक अनुमति नहीं मिल पाई है। इस कारण इस संस्था ने विद्यालय का काम अपने हाथ में नहीं लिया है। अलबत्ता संस्था के अध्यक्ष उमेश पंत का कहना है कि अनुमति मिलने तक बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था अपने संसाधनों से कर रहे हैं। रविवार को यह सामग्री विद्यालय में पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यालय बंद नहीं होगा।