संवाद न्यूज एजेंसी, धारचूला (पिथौरागढ़)। लॉकडाउन के चलते झूलापुल बंद होने से व्यास घाटी के नाबी और रोंगकांग के ग्रामीणों के जानवर नेपाल के बुग्यालों में फंसे हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के जानवर चरने के लिए नेपाल के बुग्यालों में जाते हैं। लॉकडाउन के चलते पुल बंद होने से जानवर वहीं फंसे हैं। इससे व्यास घाटी के ग्रामीण और नेपाल के रं समुदाय के तिंकर, छांगरु गांवों में लोग प्रवास पर नहीं जा पा रहे हैं। नाबी की प्रधान सनम नबियाल और रोंगकांग की अंजू रोंकली ने बताया कि नेपाल के बुग्याल में 20-20 घोड़े, खच्चर, 15 झुप्पू, झूला पुल बंद होने नेपाल में फंसे हैं। उन्होंने बताया कि सीतापुल के झूलापुल खोलने की मांग को लेकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा था। कहा कि इस पर अभी शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नाबी के युवक मंगल दल अध्यक्ष मदन सिंह नबियाल ने बताया कि झूलापुल बंद होने से माइग्रेशन में देरी के साथ ही जानवरों की देखभाल कर रहे दो मजदूरों को भी राशन की दिक्कत हो रही है। गुंजी के राजस्व उपनिरीक्षक डीसी जोशी ने बताया कि व्यास घाटी के 750 लोगों ने माइग्रेशन में जाने की अनुमति मांगी है। अभी तक लगभग सौ लोग अपने गांव जा चुके हैं। ग्रामीण बीएडीपी योजना के अंतर्गत मिले चार हजार सेब की पौध भी ले जा रहे हैं। उपजिलाधिकारी अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि नेपाल में फंसे जानवरों की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी है।