मुंबई में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा को ज्ञापन देते सीमा चकलेटी गांव के प्र
गणाई गंगोली(पिथौरागढ़)। ''हम गांव तक विकास पहुंचने की उम्मीद करते रहे लेकिन हमें हर बार मायूस होना पड़ा। हमारे गांव में सड़क नहीं पहुंची। पीने के लिए पानी तक नसीब नहीं हुआ। इन बदहाल व्यवस्थाओं से कैसे जूझते। ऐसे में हमें पलायन करना पड़ा।'' यह कहा गणाई गंगोली तहसील के बागेश्वर जिले की सीमा से लगे दूरस्थ गांव सीमा चकलेटी गांव के प्रवासियों ने मुंबई में। इस गांव की बदहाली की गूंज मुंबई तक भी जा पहुंची है। गांव से पलायन करने वाले प्रवासियों ने बीते दिनों मुंबई में आयोजित उत्तराखंड प्रवासी सम्मेलन में पहुंचे केंद्रीय सड़क व परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि हमारे गांव से पलायन होने का मुख्य कारण सड़क का न होना है। आज भी गांव तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। बीमारों और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना मजबूरी है। समय पर अस्पताल न पहुंचने से हमारे अपने रास्तों में दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा नहीं है। ऐसे में हमारे लिए पलायन करना ही मजबूरी बना है। सभी प्रवासियों ने राज्यमंत्री से सड़क की मांग करते हुए कहा कि यदि आवाजाही सुगम होगी तो हम रिवर्स पलायन कर वीरान हो रहे अपने गांव को फिर से आबाद कर सकते हैं। ज्ञापन देने वालों में मनोज भट्ट, हेम चंद्र पांडे, सुशील कुमार जोशी, महेंद्र गोसाईं, पूरन पांडे आदि मौजूद रहे।
बोले प्रवासी
मनोज भट्ट ने कहा कि गांव में सड़क की सुविधा नहीं है। ऐसे में हमने काफी दुश्वारियां झेलीं। इन्हीं से बचने के लिए पलायन करना पड़ा। यदि सड़क के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलते तो हमें पलायन नहीं करना पड़ता।
पूरन पांडे ने कहा कि हमारे गांव और इसके आसपास सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी की कोई भी सुविधा नहीं है। हमारे पलायन करने के पीछे यही बदहाल व्यवस्थाएं कारण बनी हैं। पलायन रोकना है तो गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विकास करना जरूरी है।
चंद्र बल्लभ पांडे ने कहा कि हमारे गांव सीमा चकलेटी और इसके तोक काकड़ पानी में 140 से अधिक परिवार निवास करते थे। सड़क, पानी की सुविधा न होने से 80 परिवार पलायन कर गए हैं। पलायन का दर्द तो है लेकिन क्या कर सकते हैं। सड़क पहुंचती तो रिवर्स पलायन भी होता।