इस हाल में पहुंच गई सीमू-बलतड़ी रोड
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शनिवार शाम मूनाकोट के भंडाखोली गांव में बादल फटने के बाद 16 मकानों में मलबा आने के बाद अब तक वहां जिला प्रशासन का कोई भी व्यक्ति देखने तक नहीं आया। प्रशासनिक मदद की आस में बैठे गांवों के लोगों में इस कारण बहुत गुस्सा है। गांव के लोगों को कहना है कि मकानों में पड़े मलबे को खुद साफ करना पड़ रहा है। मलबे में उनके कपड़े और खाने का सामान दबने के बाद कोई भी राहत राशि देने तक नहीं आया।
भंडाखोला गांव के अर्जुन चंद और जनक चंद का कहना है कि चुनावों के समय तो लोग वोट मांगने आ जाते हैं, लेकिन दुख की घड़ी में कोई देखने तक नहीं आया। गांव के लोगों को आसपास के गांव वालों ने खाने का सामान और अन्य सामग्री देकर मदद की है। सोमवार को खानापूर्ति के लिए गौरीहाट टीकाकरण सेंटर से एएनएम और आशा कार्यकर्ता जरूर आए, लेकिन वह भी पूरे गांव में नहीं गए।
बादल फटने के बाद आए मलबे के कारण गौरीहाट के तीन व्यापारी सड़क पर आ गए हैं। इनकी दुकानों के अंदर और बाहर मलबा भरा हुआ है। प्रशासन ने अब तक मलबा हटाने के लिए जेसीबी और मजदूर नहीं भेजे। दुकानें बंद होने से भरत राम, गोविंद राम और नवीन कुमार के समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है। काली नदी के किनारे सीमू गांव के लोगों का कहना है कि प्रशासन का कोई भी आदमी मदद के लिए नहीं आया। उन्होंने घरों और गोशालाओं के मलबे को खुद ही साफ किया।
सीमू से बलतड़ी को जाने वाली सड़क के मलबे को हटाने के लिए पीडब्ल्यूूडी ने एक जेसीबी भेजी है। अधिशासी अभियंता नवीन जोशी ने बताया कि मंगलवार से सड़क पर यातायात शुरू हो जाएगा। टूटे कलमठों की मरम्मत शुरू कर दी है। झूलाघाट-पिथौरागढ़ मार्ग पर पड़े मलबे को हटाने के लिए एक जेसीबी लगा दी है। 2-3 दिन में सड़क से मलबा पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा।