खतरे से घिरा थल का प्राचीन मंदिर
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थल के बालेश्वर मंदिर समूह परिसर में स्थित कत्यूरी काल के मंदिर को गंभीर खतरा होने लगा है। थल-डीडीहाट सड़क के विस्तारीकरण और इसमें हॉटमिक्स का काम होने के कारण मंदिर से सटी सड़क से मंदिर को नुकसान की आशंका है। सड़क पर लगातार चलने वाहनों की धमक से मंदिर को खतरा बढ़ने लगा है।
मंदिर के बांयी तरफ के पत्थर निकलने भी लगे हैं। याद रहे करीब दस साल पहले मंदिर के दांयी तरफ के कुछ पत्थर गिरने लगे थे। तब पुरातत्व विभाग ने इसकी मरम्मत कर दी। बाद में थल-डीडीहाट सड़क के विस्तारीकरण और हॉटमिक्स का काम हुआ और सड़क को ठीक मंदिर से सटाकर बना दिया गया।
इस मंदिर में हालांकि किसी देवी-देवता की मूर्ति तो नहीं रखी गई है, लेकिन इस स्थान पर आने वाले लोग मंदिर के चमत्कृत करने वाले वास्तुशिल्प को देखकर अभिभूत हो जाते हैं। बताया गया कि जब कत्यूरियों ने कुमाऊं अंचल में कई मंदिरों का निर्माण किया तो उसी समय थल में भी इस मंदिर की स्थापना कर दी। पत्थरों से बने इस मंदिर में पत्थरों को बेहतर ढंग से काटकर लगाया गया है। जानकारों के अनुसार यह मंदिर नागरशैली का है। पहाड़ पर इस तरह के मंदिर कम संख्या में हैं। लोगों का कहना है कि सड़क पर लगातार चलने वाले वाहनों के कारण मंदिर को लगातार झटके लग रहे हैं।
अब मंदिर के बाई तरफ के हिस्से में पत्थर निकलने लगे हैं। मंदिर की सुरक्षा को लेकर पुजारी खासी चिंता में हैं। पुजारी गणेश दत्त भट्ट और गिरीश चंद्र भट्ट का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा के लिए जल्दी कदम उठाए जाएं, वर्ना वास्तुशिल्प का यह अद्भुुत नमूना खतरे में पड़ जाएगा। शिव मंदिर में आने वाले लोग इस मंदिर की कला को जरूर देखते हैं।
मंदिर की मरम्मत का प्रस्ताव भेजा
पुरातत्व विभाग के अन्वेषक डा. चंद्र सिंह चौहान का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और मरम्मत का प्रस्ताव बनाया गया है। इसकी मरम्मत के लिए मशीन से पत्थरों को काटकर लगाया जाएगा, ताकि उसका मूल स्वरूप बना रहे। उन्होंने कहा कि जल्दी ही पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर की स्थिति का जायजा लेगी। उन्होंने कहा कि मंदिर की सुरक्षा के लिए विभाग गंभीर है।