धारचूला के लखनपुर और नजंग के बीच हो रही आवाजाही
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कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर लखनपुर और नजंग के बीच सीमा सड़क संगठन ने वैकल्पिक मार्ग खोल दिया है, जिससे लखनपुर, नजंग में बने लकड़ी के पुलों के बहने की समस्या पर फौरी तौर पर राहत मिली है, लेकिन आवागमन जोखिमपूर्ण बना है। लोग मलबे के ऊपर बने मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं।
सड़क निर्माण कंपनी के अनुसार दस जून तक घोड़े, खच्चरों के चलने लायक रास्ता पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। प्रशासन द्वारा लखनपुर में हुए भूस्खलन के बाद नेपाल से होते हुए दो किमी सफर के बाद नजंग में फिर से भारत में प्रवेश करने की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। नेपाल सरकार की अनुमति के बाद लखनपुर और नजंग में लकड़ी के अस्थायी पुल बनाए गए थे, इसी रास्ते से पारंपरिक माइग्रेशन भी संचालित हुआ और भारत-चीन व्यापार के लिए सामानों का ढुलान भी चल रहा था। इसी बीच बुधवार सुबह जलस्तर बढ़ने से लखनपुर में बना पुल बह गया।
नजंग का पुल भी धंस गया। इसके बाद लोग मलबे के ऊपर से ही जान जोखिम में डालकर चल रहे थे, जबकि घोड़े, खच्चरों की आवाजाही ठप हो गई थी। बीआरओ की 67 आरसीसी ने शुक्रवार को पैदल रास्ता काफी हद तक तैयार कर लिया है। सीमा सड़क संगठन के हवाले से बताया गया है कि दस जून तक घोड़े, खच्चरों के लिए भी रास्ता पूरी तरह से खुलने की उम्मीद है। सब कुछ ठीक रहा तो फरवरी से बंद पड़ा कैलाश मानसरोवर मार्ग फिर से खुल जाएगा।
उधर, भारत-चीन व्यापारियों का कहना है कि गुड़, मिश्री जैसे नाजुक खाद्य पदार्थ तेज गर्मी में गलकर खराब हो सकते हैं। लिहाजा किसी भी हालत में जल्दी से जल्दी घोड़े, खच्चरों के लिए भी मार्ग का खुलना आवश्यक है। भारत-चीन व्यापार संघ के दिनेश गुंज्याल ने कहा कि यदि तय समय पर मार्ग नहीं खुला तो व्यापारी जिला मुख्यालय और सड़क निर्माण कंपनी के मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे।