डीडीहाट में नौ माह बाद भी नहीं हटा मकानों के आगे का मलबा
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30 जून 2016 की रात आई आपदा के समय बस्तड़ी गांव तो पूरा तबाह हो गया था। साथ ही डीडीहाट नगर में भी भारी तबाही मची थी। तबाही को नौ माह बीतने पर भी पैदल रास्तों, टूटी दीवारों की मरम्मत के लिए एक पैसा नहीं मिला है। लोगों का कहना है कि दूसरा मानसूनकाल शुरू होने वाला है, लेकिन पिछले साल टूटे रास्तों की मरम्मत नहीं हो पाई है। कई घर अब भी खतरे में हैं। पैदल रास्ते चलने लायक नहीं हैं। अधिकांश मकानों के सामने मलबे के ढेर जमा हैं।
आपदा के तुरंत बाद सारा प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और नगर क्षेत्र में हुए नुकसान का आकलन कर राज्य एवं केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे गए। प्रशासन की सक्रियता से ऐसा लगा कि शायद जल्दी ही सारे राहत काम शुरू हो जाएंगे, परंतु आपदा के नौ माह बाद भी नगर पंचायत के अधीन आने वाले कई आंतरिक मार्ग पूरी तरह से टूटे हैं। लोगों को अपने ही मकान छोड़कर किराए के मकानों में रहना पड़ रहा है। नगर पंचायत अध्यक्ष कवींद्र साही ने बताया कि आपदा में नगर पंचायत को 3 करोड़ 31 लाख का नुकसान हुआ था।
सर्वाधिक नुकसान अंबेडकर वार्ड के लोदपट्टा तोक, जीआईसी के नया बस्ती तोक, तहसील वार्ड के न्यू बस्ती में हुआ था। इन तोकों को जाने वाले सभी आंतरिक मार्ग पैसा न मिलने से खस्ताहाल हैं। वहीं लोदपट्टा के कई मकानों में अब भी मलबा पटा है। नगर पंचायत को आपदा मद में अब तक मात्र 12 लाख रुपये की धनराशि ही प्राप्त हुई है।