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बाजार न मिलने से बरबाद हो गया 200 नाली भूमि में लगाया एलोवीरा

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अस्कोट (पिथौरागढ़)। वर्ष 2018 में हंसेश्वर मठ की भूमि पर एलोवेरा लगाया गया था। लोगों को एलोवेरा उत्पादन से रोजगार मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उत्पाद को बाजार नहीं मिल सका। इसके बाद इसकी खेती करना बंद कर दिया गया।
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परमानंद गिरी महाराज ने हंसेश्वर मठ की 200 नाली भूमि पर एलोवेरा की खेती की थी। उन्होंने राजस्थान से एक लाख की लागत से बीज मंगाया था। इसमें स्थानीय लोगों के सहयोग से बीज बोए गए थे। परमानंद गिरी ने बताया कि एलोवेरा हब बनाने की सोच के साथ उत्पादन शुरू किया गया, लेकिन एलोवेरा को स्थानीय स्तर पर बाजार नहीं मिल सका। इस कारण उत्पादन को विराम लगाना पड़ा। इसके चलते करीब पांच लाख का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि जंगली जानवर धान, गेहूं की खेती को लगातार नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में एलोवेरा का उत्पादन क्षेत्र के लिए वरदान साबित होता। आयुर्वेद में इसका उपयोग लाभप्रद है। उन्होंने कहा कि विभाग पहल करे तो मठ की 310 नाली में एलोवेरा या अन्य जड़ी बूटियों का उत्पादन किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा। उनका कहना है कि उन्होंने डीएम के साथ ही, उद्यान और कृषि विभाग को पत्र देकर मदद की मांग की थी, लेकिन कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एलोवेरा जड़ी बूटी से संबंधित है। इससे निराश परमानंद गिरी का कहना है कि भेषज संघ मदद करे तो मठ की भूमि पर जड़ी बूटी का उत्पादन किया जा सकता है।
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एलोवेरा की खेती भेषज संघ नहीं कराता है। इसके स्थान पर तेज पात, बड़ी इलायची या अन्य जड़ी बूटियों के उत्पादन के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। तेज पात और बड़ी इलायची का उत्पादन किसानों के लिए फायदेमंद है।
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- राजेंद्र सिंह, सचिव भेषज संघ पिथौरागढ़।
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कोट.........
एलोवीरा कब्ज, पेट संबंधी बीमारियों में रामबाण की तरह काम करता है। जले पर इसका लेप लगाने से मरीज को राहत मिलती है। क्रीम और लोशन बनाने में एलोवेरा का उपयोग होता है।
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- डॉ. डमर सिंह बोनाल, आयुर्वेद चिकित्सक अस्कोट।
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