पिथौरागढ़। उद्यान विभाग के जिला योजना, प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना के तहत काश्तकारों को फल-सब्जियों के बेहतर उत्पादन के लिए प्लास्टिक मल्चिंग, एंटी हेलनेट और हाईब्रिड बीज उपलब्ध कराए गए। इससे काश्तकारों ने पांच हजार क्विंटल सब्जियों का उत्पादन किया।
विभाग को इन तीन योजनाओं के तहत 31 लाख 61 हजार पांच सौ रुपये स्वीकृत हुए। इसमें बागवानी मिशन योजना के तहत विण, गुरना, नाकोट उद्यान संचल दल केंद्र को प्लास्टिक मल्चिंग के लिए 13.248 लाख रुपये और पीएमकेएसवाई योजना में एंटी हेलनेट के लिए 15.567 लाख रुपये और जिला योजना में 2.80 लाख रुपये स्वीकृत हुए।
इस योजना से काश्तकारों को 72 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्लास्टिक मल्चिंग, 47,692 वर्गमीटर क्षेत्रफल में एंटी हेलनेट, 12 हेक्टेयर के लिए सब्जी का हाइब्रिड बीज उपलब्ध कराए गए। इससे काश्तकारों के फल-सब्जियों की उपज में बढ़ोतरी हुई। काश्तकारों ने कहना है कि इससे पूर्व सब्जी और फलों के उत्पादन में काफी दिक्कतें होती थी। सीजन के समय पर आधुनिक तरीकों से फल-सब्जियों के उत्पादन से प्रत्येक काश्तकार लगभग दो से ढाई लाख रुपये की आमदनी कर रहा है। काश्तकारों ने कहा कि पूर्व में फल-सब्जी का कम उत्पादन होने से अधिकतर लोग पलायन करने को मजबूर थे।
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काश्तकार कर रहे सब्जियों का आधुनिक तकनीक से उत्पादन
जिले में सिंथोली, जगतड़, गणगण, जजुराली, विलोट, बमनथल, बांस सहित अन्य गांव के 150 काश्तकार केवल सब्जियों का आधुनिक तकनीक से उत्पादन कर रहे है। काश्तकार हाइब्रिड बीज और आधुनिक उपकरणों की मदद से टमाटर, फूल, बंद गोभी, मटर, ब्रोकली, धनिया, बैंगन, शिमला मिर्च आदि सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
योजनाओं के तहत मिलता है 50 प्रतिशत का अनुदान
काश्तकारों को इन योजनाओं के तहत आधुनिक उपकरण और बीज खरीदने में 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। इससे काश्तकारों को कम लागत में आधुनिक उपकरण, बीज उपलब्ध होते है जिससे किसान अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।
आधुनिक तकनीक से उत्पादन करने पर उपज अधिक होती है। विभाग बेहतर उत्पादन के लिए हाइब्रिड बीज के साथ कीटनाशक दवा की जानकारी और प्रशिक्षण भी देता है। इससे पलायन में भी कमी आई है। - अभिनय कुमार, मुख्य उद्यान अधिकारी, पिथौरागढ़