कमान सिंह, समाजसेवी अजेड़ा गांव।
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के दो गांवों हचीला और अजेड़ा के बीच झगड़े के कारण 90 साल पहले बंद हो चुके वैवाहिक संबंध फिर से शुरू होंगे। युवाओं की पहल और बुजुर्गों की सलाह के बाद 1930 में खत्म हो चुके दोनों गांवों के संबंध फिर सुधरने जा रहे हैं। दोनों गांवों के लोगों ने कोकिला माता मंदिर पहुंचकर पुराने झगड़ों को भुलाकर फिर से वैवाहिक समेत शुरू करने की अनुमति मांगी है।
डीडीहाट विकासखंड के हचीला और अजेड़ा गांवों की दूरी लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि 1930 तक दोनों गांवों के बीच अच्छे संबंध थे। दोनों गांवों के बेटे-बेटियों की आपस में शादियां होती थीं। ग्रामीणों के अनुसार 1930 में दोनों गांवों की चोटी पर स्थित लोड़ी के जंगल और चारे पर हक जताने को लेकर ग्रामीणों में मनमुटाव शुरू हुआ था। झगड़ा इतना बढ़ा कि दोनों गांवों के ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर माता कोकिला के दरबार में पहुंच गए। इसके बाद ग्रामीणों ने बोलचाल के साथ ही एक-दूसरे के गांवों में विवाह करने भी बंद कर दिए।
1930 में बिगड़े संबंध यूं ही चलते रहे। अब नई पीढ़ी के बीच बातचीत तो शुरू हुई, लेकिन विवाह संबंध फिर भी शुरू नहीं हो पाए। जब दोनों गांवों की युवा पीढ़ी को झगड़े की कहानी का पता चला तो उन्होंने फिर से संबंध सुधारने और विवाह संबंध शुरू करने को लेकर पहल की। बुजुर्गों की सलाह ली गई तो उनसे भी सहर्ष स्वीकृति मिल गई। आपसी सलाह मशविरे के बाद 21 दिसंबर 2020 को हचीला गांव से समाज सेवी जमन सिंह बोरा और प्रधान हंसा देवी और अजेड़ा गांव से समाज सेवी कमान सिंह और प्रधान बलदेव के नेतृत्व में लोगों ने कोकिला माता के मंदिर पहुंचकर पुराने सभी झगड़ों को भुलाकर फिर से वैवाहिक संबंध शुरू करने की अनुमति मांगी।
जिस जंगल के लिए 90 साल पहले झगड़ा हुआ होगा उस समय के लोग अब नहीं हैं। युवा पीढ़ी को उस विवाद या मनमुटाव के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जंगल के चारे के लिए झगड़ा हुआ होगा। पशुपालन बंद होने से अब उस चारे पर भी निर्भरता कम हो गई है। युवाओं की पहल पर माता के दरबार में संबंधों में सुधार की अर्जी दी गई है। दोनों गांवों के संबंध सुधरने पर उन्हें काफी खुशी है। अब दोनों गांवों के बीच विवाह संबंध हो सकेंगे। - जमन सिंह नेगी, समाजसेवी हचीला गांव।
दोनों गांवों के बीच विवाद की बात बहुत पुरानी है। दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। शिक्षित युवा पीढ़ी की सोच में काफी बदलाव आया है। दोनों गांवों के युवाओं की पहल से जो भी विवाद था, उसे माता कोकिला के दरबार में सुलझा लिया गया है। अब दोनों गांवों में शादियां हो सकती हैं। गांवों के युवाओं और बुजुर्गों की सहमति के बाद लिए गए इस निर्णय से उन्हें काफी खुशी है। - कमान सिंह, समाजसेवी अजेड़ा गांव।
जमन सिंह नेगी, समाजसेवी हचीला गांव।- फोटो : PITHORAGARH