दस के सिक्के नहीं लिए से खफा व्यापारियों एवं आम नागरिकों ने जिला प्रशासन और एसबीआई के खिलाफ प्रदर्शन किया।
अठखेत ग्राम प्रधान दीपक सिंह भैंसोड़ा के नेतृत्व में थल बाजार में एकत्र लोगों ने कहा कि उनके पास दस के सिक्के अधिक मात्रा में जमा हो गए हैं। बैंक इन सिक्कों को लेने से मना कर रहा है। इसके कारण दस के सिक्कों को लेकर व्यापारियों और क्षेत्रवासियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। दस के सिक्के नहीं लेने कारण बैंक के खिलाफ लोगों में आक्रोश है। व्यापारियों का कहना है कि इन सिक्कों में असली और नकली की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल है।
लोग दुकानदार से दस का सिक्का लेने के बजाए दस का नोट मांग रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि दस के सिक्कों की स्थिति साफ नहीं की गई तो जिला प्रशासन और बैंक के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। प्रदर्शन में महिमन मेहरा, जगदीश कन्याल, मान सिंह चुफाल, कुंदन राम, महेश जोशी, भगवान नेगी, दीपक सामंत, बबलू कुमार, खड़क मेहता आदि शामिल थे।
सिक्के न लेने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई
सीओ हिमांशु शाह का कहना है कि दस के सिक्के नहीं लेने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आरबीआई के मापदंडों को मानने से इनकार करने पर आईपीसी की धारा 489 ए से लेकर 489 ई के तहत केस दर्ज किया जा सकता है।
10 के सिक्कों की ऐसे करें पहचान
थल एसबीआई के प्रबंधक एके गुप्ता ने बताया कि नकली सिक्के में बनी लकीरों की संख्या 15 होती है, जबकि असली सिक्के में दस लकीरें होती हैं। दस के असली सिक्के की तुलना में नकली सिक्के में बनी दस लकीरें मोटी होती हैं। नकली सिक्के में सत्यमेव जयते स्पष्ट पढ़ने में नहीं आता है। असली सिक्के में भारत और इंडिया अलग-अलग लिखा होता है, जबकि नकली में एक साथ लिखा होता है। दस के असली सिक्के में रुपए का चिन्ह और 10 बना होता है, जबकि नकली सिक्के के बीच में सिर्फ 10 बना होता है।