पिथौरागढ़ में रमसा की कार्यशाला में मौजूद प्रधानाचार्य
- फोटो : अमर उजाला
सरकारी स्कूलों में कक्षा नौ में प्रवेश लेने वाले कमजोर बच्चों की पहचान कर अब उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। कक्षा नौ में प्रवेश लेने वाले हर विद्यार्थी का पहले लर्निंग लेबल जांचा जाएगा। विद्यार्थी जिस विषय में कमजोर होगा, उस विषय में उसे विद्यालय में ही अतिरिक्त कक्षा की सुविधा मिलेगी।
शुक्रवार को यहां जीआईसी हाल में हुई राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि आमतौर पर कक्षा आठ पास कर नौ में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के सामने एकदम नया पाठ्यक्रम आ जाता है। जूनियर कक्षाओं के बजाय हाईस्कूल में कोर्स ज्यादा कठिन होता है। यदि कक्षा नौ से ही कमजोर बच्चों के अतिरिक्त शिक्षण पर ध्यान दिया जाए तो हाइस्कूल का बेहतर रिजल्ट सामने आ जाता है। रमसा के सहायक राज्य परियोजना अधिकारी डा. मोहन बिष्ट और बीएस रावत ने कहा कि अक्सर विद्यार्थियों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों में कठिनाई आती है।
अब सभी विद्यालयों में कक्षा नौ में प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों का टेस्ट होगा। कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षा की व्यवस्था रहेगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया ने सभी प्रधानाचार्यों से कहा कि कार्यशाला में दिए गए निर्देशों का पालन करें और कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन करें। कार्यशाला में रमसा के जिला परियोजना अधिकारी वाईएस चौधरी, संयोजक प्रकाश चंद्र पंत, संजय जोशी, कमलेश उपाध्याय, जिला संदर्भ व्यक्ति विनोद कुमार टम्टा समेत सभी खंड शिक्षा अधिकारी, प्रधानाचार्य उपस्थित थे। संचालन वीके टम्टा ने किया।