पिथौरागढ़ में कैलाश भूक्षेत्र की कार्यशाला में मौजूद अधिकारी
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कैलाश भू-परिक्षेत्र परियोजना के तहत आयोजित कार्यशाला में परती भूमि का क्षेत्र बढ़ने और सूखते जल स्रोतों को लेकर चिंता जताई गई। विशेषज्ञों ने हालात से उबरने के लिए स्थानीय समुदाय को संरक्षण की कार्ययोजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।
विकास भवन सभागार में शुक्रवार को परियोजना के तहत अल्मोड़ा के जीबी पंत पर्यावरण संस्थान एवं दिल्ली की संस्था आईयूसीएन के विशेषज्ञों ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ साझा किया। विशेषज्ञों ने स्लाइड शो के जरिये परती भूमि क्षेत्र बढ़ने संबंधी संबंधी रिपोर्ट पेश की। इसके साथ ही सुधार के लिए कारगर तकनीकी उपायों की जानकारी दी। बताया कि किस तरह बंजर भूमि को खेती के लिए पुन: स्थापित किया जा सकता है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने जल स्रोतों के संबंध में भी अध्ययन रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि किन-किन कारणों के चलते स्रोतों पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने संरक्षण के उपायों में स्थानीय समुदाय की आर्थिक भागीदारी पर जोर दिया।
डीएम सी रविशंकर ने विश्वास जताया कि परियोजना की अध्ययन रिपोर्ट से जिले में कारगर योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को अध्ययन रिपोर्ट के नतीजों और तात्कालिक जरूरतों के मुताबिक कार्ययोजनाएं तैयार करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार, डॉ. अनुश्री, डॉ. गिरीश नेगी, डॉ. ईश्वर के अलावा डीएफओ डॉ. विनय भार्गव, पीडी डीडी पंत, डीडीओ गोपाल गिरी, नाबार्ड के डीजीएम पुनीत नागर आदि थे।