जिला एवं सत्र न्यायालय ने पत्नी का उत्पीड़न कर उसे आत्महत्या के लिए विवश करने वाले पति को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिकंद कुमार त्यागी ने बृहस्पतिवार को यह फैसला सुनाया।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार तहसील गणाईगंगोली के ग्वाड़ी गांव निवासी जीवन सिंह की पत्नी गीता देवी ने पांच जून 2014 को घर के बाहर पेड़ पर लटककर आत्महत्या कर ली थी। जीवन सिंह ने पहले गीता देवी की बड़ी बहन आशा देवी से शादी की थी। जब आशा देवी से कोई संतान नहीं हुई तो वह आशा देवी की छोटी बहन यानि कि अपनी साली गीता को जबर्दस्ती अपने घर पर ले आया और पत्नी की तरह रख लिया। पति की इस हरकत से परेशान पहली पत्नी आशा देवी घर छोड़कर चली गई। इसके बाद गीता से दो बच्चे हो गए।
जीवन सिंह पर आरोप है कि वह अपनी दूसरी पत्नी गीता को दहेज से लिए परेशान करता था और मारपीट करता था। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर गीता ने आत्महत्या कर ली। अदालत ने इस मामले में मृतका के पिता हिम्मत सिंह, आरोपी की पहली पत्नी आशा देवी समेत तीन गवाहों के बयान लिए और आरोपी जीवन सिंह को धारा 306 के तहत दोषी मानते हुए सजा सुना दी गई।