पिथौरागढ़। चीन सीमा को जोड़ने वाली सामरिक महत्व की तवाघाट-सोबला सड़क पिछले एक माह से अधिक समय से बंद है। इस कारण सीमा पर जा रहे सैनिकों और स्थानीय लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर इस सड़क का निर्बाध खुले रहना जरूरी है।
इधर, भारत सेना ने भी सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दीं हैं। तवाघाट से सोबला तक बीआरओ सड़क निर्माण का कार्य कर रहा है। बजट नहीं होने के चलते ग्रिफ आपदा में ध्वस्त सुरक्षा दीवारों को नहीं बना पा रहा है।
लोनिवि के एई जीसी भट्ट का कहना है कि नारायण पुर, ओखल में क्षतिग्रस्त दीवारों का निर्माण किया जा रहा है। जल्द वाहनों की आवाजाही सुचारु हो जाएगी। सेवानिवृत्त फ ॉरेस्ट एडीजी बिशन सिंह बौनाल ने तवाघाट-सोबला सड़क को शीघ्र खोलने की मांग की है।
चीन सीमा को जोड़ने वाली इस सड़क के बंद होने से दारमा और चौंदास के 28 गांवों के साथ ही 22 अन्य गांवों के लोगों को दिक्कतें हो रहीं हैं। ग्रामीणों ने सड़क को शीघ्र नहीं खोलने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
कई मकान रहने लायक नहीं
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मालुपाती में जमीन धंसने से हरीश सिंह, हरीश गिरी, गोपाल गिरी, सरिता का मकान ध्वस्त हो गया है। इसके अलावा 26 लोगों के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। तल्ला हरकोट, रीठा, मालुपाती 56 लोगों के मकानों में दरारें पड़ गईं हैं। मालुपाती के 12 परिवार गांव में ही अन्यत्र रह रहे हैं। तल्ला हरकोट में महेंद्र सिंह टेंट में रह रहे हैं लेकिन अब तक मात्र 6 परिवारों को ही खाद्यान्न पैकेट मिल पाए हैं। एक भी परिवार को मुआवजा नहीं मिला है। हरकोट के समाजसेवी खुशाल जेष्ठा का कहना है कि अब तक केवल राजस्व उपनिरीक्षक, ग्राम पंचायत अधिकारी, मनरेगा कर्मी और जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने ही गांव का भ्रमण किया है। गांव के 56 परिवारों को विस्थापित किया जाना जरूरी है। वरना कभी भी पूरा गांव जमीदोज हो सकता है।
कुमाऊं कमिश्नर के दौरे के बाद भी मुआवजा नहीं मिला मुआवजा
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। आपदा क्षेत्रों में कुमाऊं कमिश्नर ने दौरा कर तहसीलदार के नेतृत्व में एक पांच सदस्यीय जांच टीम आपदा के पुनर्मूल्यांकन के लिए बनाई गई थी। टीम ने मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट अभी तक ठंडे बस्ते में ही पड़ी है। अब भी ज्यादातर परिवार राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। धापा के आपदा प्रभावित महिमन सिंह ने कहा कि न तो मुआवजा ही मिल पाया है और न ही विस्थापन पर बात हो रही है। गांव में कमिश्नर, डीएम, पूर्व सीएम, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा, विधायक हरीश धामी भी आए, लेकिन अभी तक आपदा प्रभावितों को नहीं मिल पाया है।