चंपावत। जिले में रक्त की उपलब्धता संतोषजनक है। जिला अस्पताल के रक्त कोष की क्षमता 50 से 60 यूनिट है, जबकि मासिक खपत औसतन 40 से 50 यूनिट है। जिले में 400 से अधिक सक्रिय रक्तदाता हैं, जिससे दूसरे जिले पर निर्भरता नहीं है। चंपावत के उपजिला अस्पतालों लोहाघाट और टनकपुर में भी रक्त भंडारण है। इनमें सालाना 350 से 600 यूनिट रक्त रखा जाता है।
पैथोलॉजिस्ट सिद्धार्थ त्यागी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में दुर्घटना, आपातकालीन स्थिति और डेंगू के मरीजों को रक्त निशुल्क दिया जाता है। निजी अस्पतालों को यही रक्त 1100 रुपये प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध कराया जाता है। अस्पतालों में मौजूद रक्त के स्टॉक की जानकारी जिलेवार ई-रक्तकोष पोर्टल (eraktkosh.mohfw.gov.in/eraktkosh) पर अपडेट रहती है।
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रक्तदान से पहले और बाद में इन बातों का रखें ध्यान
-रक्तदान कभी भी खाली पेट नहीं करना चाहिए।
-रक्तदान के बाद दो घंटे तक धूम्रपान नहीं करना चाहिए और वाहन नहीं चलाना चाहिए।
-शराब और मांस-मछली का सेवन करने के बाद रक्तदान नहीं करना चाहिए।
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कोई 22 तो कोई आठ बार कर चुका है रक्तदान
रक्तदान को मानव सेवा का माध्यम मानते हुए जिले के कई लोग लगातार जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इनमें लैब टेक्नीशियन उमेद सिंह बसेड़ा अब तक 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। वहीं रमेश जोशी ने 13 बार, सावित्री राय ने 12 बार और हरीश पांडे ने आठ बार रक्तदान किया है। इन रक्तदाताओं का कहना है कि रक्तदान से किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में मदद मिल सकती है, इसलिए स्वस्थ लोगों को भी समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। नियमित रक्तदान करने वाले इन लोगों की पहल समाज में दूसरों को भी रक्तदान के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का काम कर रही है।
रक्तदान महज एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने का माध्यम भी है। स्वस्थ और सक्षम लोगों से समय-समय पर रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उनका कहना है कि नियमित रक्तदान से जरूरत के समय मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
सावित्री राय, रक्तदाता, चंपावत
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रक्तदान को केवल जरूरत के समय की जाने वाली मदद तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति को इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाना चाहिए। समय-समय पर लोगों को रक्तदान करना चाहिए।
रमेश जोशी, रक्तदाता, चंपावत