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Pithoragarh News: बंगापानी के टांगा में गरारी से गिरकर अधेड़ की मौत

Sun, 09 Nov 2025 10:56 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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प्रेम सिंह नेगी। (फाइल फोटो)
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। एक तरफ हम राज्य गठन की 25वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। दूसरी तरफ आज भी पुल न होने की वजह से लोगों का बदहाल गरारियों के जरिये नदियों को पार करना मजबूरी है। बंगापानी के सेरघटिया में लगी गरारी से गिरकर शनिवार रात टांगा निवासी प्रेम सिंह नेगी (53) पुत्र रुद्र सिंह की मौत हो गई।
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शनिवार को प्रेम सिंह अपने ससुराल फर्वेकोट गांव गए थे। शाम को लौटते समय सेरघटिया नदी पर आवाजाही के लिए एकमात्र विकल्प गरारी से वह अचानक गिर गए। देर रात तक जब प्रेम सिंह घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने सोचा कि वह ससुराल में ही रुक गए होंगे। रविवार सुबह कुछ लोग नदी की तरफ जा रहे थे तो किनारे पड़े प्रेम सिंह पर उनकी नजर पड़ी। उन्होंने निकट जाकर देखा तो उनकी मौत हो चुकी थी।
सूचना पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक है और सिस्टम के प्रति आक्रोश भी। ग्राम प्रधान विक्रम सिंह बथ्याल ने बताया कि लंबे समय से गरारी क्षतिग्रस्त है। न तो इसकी सर्विसिंग की गई है और ना ही ग्रीसिंग। इस लापरवाही के कारण ही प्रेम सिंह की मौत हुई है। प्रेम सिंह घर के इकलौते कमाने वाले थे। उनका एक बेटा और बेटी है जो नाबालिग हैं। पति की मौत से पत्नी बदहवास है। दोनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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नदी पर बना होता पुल तो न जाती एक और जान
जिले की प्रमुख नदियों पर आठ से अधिक गरारियां हैं जो संबंधित क्षेत्र के लोगों की आवाजाही का एकमात्र जरिया हैं। आए दिन इन गरारी से गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं तो कई को जान गंवानी पड़ रही है। हर बार बैठकों और घोषणाओं में जानलेवा बनीं इन गरारी की जगह पक्के पुल बनाने की बात होती है लेकिन एक्शन नहीं हो पा रहा है। बंगापानी, मुनस्यारी और धारचूला क्षेत्र की पांच हजार से अधिक की आबादी हर रोज इन बदहाल गरारियों से जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
संचार सेवा दुरुस्त होती तो समय से शुरू होती खोजबीन
बंगापानी तहसील के टांगा, बिंदी, फर्वेकोट, बोना, तोमिक, गोल्फा सहित अन्य कई ऐसे गांव हैं जो मोबाइल फोन के युग में संचार सेवा से वंचित हैं। इस बदहाल व्यवस्था की मार क्षेत्र की बड़ी आबादी सह रही है। प्रेम सिंह ससुराल से घर लौटते समय गरारी से गिर गए। फर्वेकोट और टांगा में संचार सेवा न होने से ससुराल से घर लौटने की जानकारी परिजनों को नहीं मिली। यदि संचार सेवा दुरुस्त होती तो यह जानकारी परिजनों को मिल जाती। देर रात तक घर न पहुंचने पर परिजन उनकी खोजबीन शुरू करते। समय रहते घटना का पता चलने पर इलाज मिलने से शायद उनकी उनकी जान बच जाती। संचार सेवा न होने से परिजनों को उसके फर्वेकोट में ही रुकने का अंदाजा लगाना पड़ा।
पुल निर्माण न होने पर आमरण अनशन शुरू करेंगे ग्रामीण
ग्राम प्रधान विक्रम सिंह बथ्याल ने कहा कि आजादी के 78 और राज्य स्थापना के 25 साल बाद भी उनका गांव और आसपास के कई गांव संचार सेवा से वंचित हैं। आवाजाही के लिए सड़क तो दूर नदियों, गधेरों पर पुल नहीं बन सके हैं। गरारियां आए दिन लोगों की जान ले रही हैं। प्रधान ने कहा कि कब तक हमारे लोग इन गरारियों से गिरकर अपनी जान गंवाते रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही गरारियों की जगह पक्के पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्र के लोगों को साथ लेकर आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। उन्होंने मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी की है।
महिला गरारी से गिरकर हो गई थी घायल
25 जुलाई को इसी गरारी से टांगा गांव की यशोदा देवी नदी में गिर गई थीं। संयोग से उनकी जान बच गई लेकिन गंभीर चोटें आईं। बंगापानी तहसील के मनकोट, घुरुड़ी, बरम, घट्टाबगड़, दानीबगड़, मोतीघाट, गोल्फा, टांगा आदि गांवों के ग्रामीण और विद्यार्थी हर रोज जान जोखिम में डालकर इन गरारी से आवाजाही करते हैं। नदियों और नालों पर लगीं अधिकतर गरारियां जंग खा चुकी हैं। इन्हें खींच पाना मुश्किल हो रहा है।
कोट
घटना की सूचना मिलने पर टीम के साथ मौके पर पहुंटा था। कुछ समय पूर्व ही गरारी की मरम्मत की गई है। फिर भी घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। - चंद्र पाल, नायब तहसीलदार, बंगापानी
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