कनालीछीना (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर यहां के लोगों के साथ मजाक किया जा रहा है। कनालीछीना पीएचसी इसका प्रमाण है। यहां सीएचसी के लिए बने भवन में पीएचसी का संचालन हो रहा है। मामूली रोग का इलाज तो यहां हो जाता है लेकिन गंभीर बीमारी के इलाज के लिए विकासखंड की 40 हजार की आबादी को अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
दरअसल, वर्ष 2010 में कनालीछीना सीएचसी के लिए चार करोड़ रुपये की लागत से नए भवन का निर्माण किया गया। तत्कालीन सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने इसका शुभारंभ किया। उस समय यहां सीएचसी का बोर्ड भी लगाया गया। भवन बनने के बाद इसमें पीएचसी ही संचालित हुआ तो इस पर सवाल उठने लगे। अस्पताल का उच्चीकरण करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी का बोर्ड हटाकर पीएचसी का बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उच्चीकरण न होने से इस अस्पताल में आज तक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो सकीं हैं। न तो पर्याप्त चिकित्सक तैनात हैं और न सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों की शरण लेना मजबूरी बना है।
न एक्सरे न लैब
कनालीछीना। पीएचसी कनालीछीना का उच्चीकरण न होने से यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है। यहां न तो एक्सरे होता है और न लैब की सुविधा उपलब्ध है। निजी लैब से अनुबंध कर सिर्फ सैंपल लिए जा रहे हैं। इन्हें जांच के लिए जिला मुख्यालय भेजा जाता है। वहीं अस्पताल में फार्मासिस्ट की तैनाती भी नहीं है। स्टाफ नर्स सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को दवा बांटनी पड़ रही है।
लोगों की पीड़ा
सीएचसी के नाम पर क्षेत्र की जनता के साथ धोखा किया गया है। जब सीएचसी का संचालन नहीं करना था तो इसके लिए भवन क्यों बनाया। उच्चीकरण न होने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। -जीवन भंडारी, कनालीछीना
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे हवा हवाई हैं। सीएचसी के नाम से खोले गए अस्पताल में पीएचसी का संचालन करना गंभीर है। शासन और जनप्रतिनिधियों को इस मामले का संज्ञान लेकर उचित हल निकालना चाहिए। - रमेश जोशी, कनालीछीना
कोट
कनालीछीना में फिलहाल पीएचसी संचालित है। उच्चीकरण का मामला शासन स्तर का है। हर मरीज का बेहतर इलाज करने के लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीरता से काम कर रहा है। फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। - डॉ. प्रशांत धानिक, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पीएचसी कनालीछीना