पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय के नजदीक थरकोट में प्रस्तावित झील के लिए शासन ने धन अवमुक्त नहीं कराया है। इस कारण आठ वर्ष पूर्व स्वीकृत इस झील के निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। झील के निर्माण पर 21 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।
थरकोट में कृत्रिम झील के निर्माण की घोषणा 2006 में हो गई थी। 2007 में जब प्रकाश पंत प्रदेश के पर्यटन मंत्री बने तो उन्होंने सबसे पहला काम झील की आधारशिला रखने का ही किया था। कुछ समय तक आधारशिला का यह पत्थर टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाइवे में थरकोट के पास सड़क के किनारे लगा हुआ था। बाद में यह पत्थर हटा दिया गया और एक प्रकार से झील निर्माण की कवायद ठंडे बस्ते में चली गई। थरकोट झील के स्थल का निरीक्षण करने के लिए आईआईटी रुड़की के भूवैज्ञानिकों की टीम ने भी सर्वे किया था। टीम ने स्थान को झील के लिए उपयुक्त बताया था। प्रस्तावित झील की लंबाई 700 मीटर, चौड़ाई 84 मीटर आंकी गई। झील की क्षमता दो लाख घनमीटर पानी की रखी गई। कहा गया कि पिथौरागढ़ नगर को पानी की सप्लाई करने में झील सहायक साबित होगी। सूखे के मौसम में झील से 10 एमएलडी और मानसून सीजन में 13 एमएलडी पानी प्राप्त करने का लक्ष्य भी रखा गया था।
झील के निर्माण के लिए जिला पर्यटन अधिकारी एसएस यादव के स्तर से उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भी भेजा गया लेकिन अभी तक शासन ने इस मद में धन अवमुक्त नहीं किया है।