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उक्रांद राज्य में 23 जिलों और चार कमिश्नरी के पक्ष में

Sun, 30 Mar 2014 05:34 AM IST
Pithoragarh
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पिथौरागढ़। उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना 1979 में हुई थी। तब से लेकर लगातार राज्य की अवधारणा और उसके स्वरूप को लेकर दल में विचार-विमर्श चलते रहे। 2000 में राज्य का गठन तो हो गया लेकिन उक्रांद ने राज्य में जिस तरह के प्रशासनिक ढांचे की परिकल्पना की थी, उसमें कोई फेरबदल नहीं हुआ। यूपी के समय जितने जिले थे, राज्य गठन के बाद भी जिलों की संख्या उतनी ही है। नए कमिश्नरी नहीं खुले। उक्रांद ने राज्य को लेकर जो ब्लू प्रिंट तैयार किया था उसमें उल्लिखित बातें पूरी नहीं हो पाई हैं।
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इस ब्लू प्रिंट में प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से राज्य को 23 जिलों में बांटने की बात कही गई थी।
इनमें चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, काशीपुर, मंदाकिनी, लैंसडाउन, उत्तरकाशी, टिहरी, नरेंद्रनगर, डीडीहाट, काशीपुर, अल्मोड़ा, रानीखेत, पंतनगर, चमोली, पौड़ी, रामगंगा, रवांई, प्रतापनगर, देहरादून, विकासनगर, चंद्रनगर, हरिद्वार शामिल थे। चंद्रनगर को राजधानी क्षेत्र के रूप में रखा गया था।
उक्रांद ने पिथौरागढ़, नैनीताल, पौड़ी और देहरादून कमिश्नरी की बात भी कही थी। तहसीलों की संख्या 65 करने की बात भी ब्लू प्रिंट में कही गई। उक्रांद ने विधानसभा क्षेत्र की आबादी 70 हजार रखने की बात पर जोर दिया। इस आधार पर राज्य में 105 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए। विकासखंडों की संख्या के बारे में भी ब्लू प्रिंट में साफ तौर पर कहा गया है कि इस समय 96 विकासखंड हैं। एक विकासखंड में 125 तक ग्राम सभाएं शामिल हैं। उक्रांद ने तय किया था कि कम से कम 30 और अधिक से अधिक 50 ग्राम पंचायतों को मिलाकर एक विकासखंड बनाया जाए। इस तरह राज्य में विकासखंडों की संख्या कम से कम 150 होनी चाहिए।
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ब्लू प्रिंट को तैयार करने में स्व. इंद्रमणि बडौनी, काशी सिंह ऐरी, पुष्कर सिंह धामी, विपिन चंद्र त्रिपाठी, चंद्रशेखर कापड़ी ने सहयोग दिया। राज्य की राजधानी को लेकर उक्रांद की राय पहले से एक सी रही है। वह चंद्रनगर (गैरसैंण) होनी चाहिए। राज्य में पूर्व सैनिकों की संख्या को देखते हुए अलग से सैन्य मंत्रालय की बात भी उक्रांद के ब्लू प्रिंट में शामिल रही है। उक्रांद के वरिष्ठ नेता पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि ब्लू प्रिंट में जो मुद्दे शामिल किए गए थे, राज्य गठन के बाद उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ।
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