पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय से 120 किमी की दूरी पर उच्च हिमालयी क्षेत्र नामिक में बसे लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। ग्रामीणों ने समस्या का निराकरण न होने पर पंचायत और लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने के साथ ही जिला मुख्यालय में आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। गांव में मई से बिजली नहीं है। 27 किमी के पैदल दूरी पर बसे इस गांव में स्थापित हाईस्कूल की कक्षाओं का संचालन जूनियर हाईस्कूल में तैनात एकलौता शिक्षक कर रहा है। गांव के 118 परिवार घोर अभावों में जी रहे हैं।
120 किमी दूर नामिक से जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने अपर जिलाधिकारी बीएल राना के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि मई से गांव में बिजली नहीं है। मई में गांव की एक बालिका बिजली लाइन की चपेट में आकर मारी गई थी। तब से उरेड़ा की 50 किलोवाट की परियोजना से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है। बिजली की लाइन की चपेट में आकर मरी बालिका के परिजनों को आज तक उरेडा ने मुआवजा नहीं दिया है।
नामिक जाने के लिए द्वालीगाड़ नामक स्थान से 27 किमी पैदल चलना पड़ता है। स्वीकृति के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हो रहा है। आपदा के बाद से खच्चरों के चलने लायक पैदल रास्तों को नहीं बनाया गया है। नामिक हाईस्कूल को जूनियर हाईस्कूल का एक शिक्षक संचालित कर रहा है। लगातार मांग के बाद भी हाईस्कूल में शिक्षकों की तैनाती नहीं की जा रही है। एडीएम से मिले गांव के प्रताप सिंह टाकुली, भवान सिंह भंडारी, गंगू राम, पूर्व प्रधान तुलसी देवी ने कहा है कि समस्याओं का निराकरण नहीं होता है तो जिला मुख्यालय में आंदोलन शुरू किया जाएघा। पंचायत और लोकसभा चुनाव का भी ग्रामीण बहिष्कार करेंगे। बता दें कि नामिक के लोगों ने उन्हीं मांगों को लेकर वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों का बहिष्कार किया था।