पिथौरागढ़। कुमाऊं मंडल में अब तक तीन मेगावाट से कम उत्पादन करने वाली जिन परियोजनाओं की मरम्मत और देखरेख उत्तराखंड लघु जल विद्युत निगम कर रहा था वह सभी परियोजनाएं अब उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) के अधीन आ गई हैं। इनमें नैनीताल और बागेश्वर की एक एक, चंपावत की दो और पिथौरागढ़ की नौ परियोजनाएं शामिल हैं। लघु जल विद्युत निगम के पास अब तीन मेगावाट से ज्यादा उत्पादन करने वाली परियोजनाएं ही रह गई हैं।
शासन ने पिछले दिनों फैसला लिया कि तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली बिजली परियोजनाएं उरेडा को सौंप दी जाए। दोनों विभागों ने लंबी पहल के बाद परियोजनाओं के हस्तांतरण का काम पूरा कर लिया है। पिथौरागढ़ जिले में लघु जल विद्युत निगम के थल खंड के अधीन आने वाली सुरिंगगाड़, बरार, गराऊं, छड़नदेव और तालेश्वर परियोजना, धारचूला खंड के अधीन आने वाली कंच्योती, छिरकिला, ऐलागाड़ और कुलागाड़, चंपावत जिले की सप्तेश्वर और गौड़ी, नैनीताल जिले की कोटाबाग और बागेश्वर जिले की बालीघाट परियोजना का हस्तांतरण हो गया है। अब इन परियोजनाओं की देखरेख का काम उरेड़ा करेगी। लघु जल विद्युत निगम के उपमहाप्रबंधक जीएस बुदियाल ने बताया कि उरेडा इन परियोजनाओं की मरम्मत का काम खुद करेगी लेकिन बिजली का वितरण पहले की तरह पावर कारपोरेशन करेगा। बिजली बिलों की वसूली भी पावर कारपोरेशन को ही करनी होगी।