पिथौरागढ़। विकास के दावे हकीकत की उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। कनालीछीना विकासखंड के मुवानी घाटी की तस्वीर को देख तो ऐसा ही कहा जा सकता है। यहां स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर उच्च शिक्षा तक की कोई व्यवस्था नहीं है। इंटर से आगे की शिक्षा के लिए यहां के लोगों को 45 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय आने को मजबूर होना पड़ता है। बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही यह घाटी अब अपने अस्तित्व के लिए सड़कों पर उतरेगी।
तीन दर्जन ग्राम पंचायतों वाली मुवानी घाटी के लोग 21वीं सदी में भी आजादी से पहले के हालात में जी रहे हैं। शिक्षा के लिए यहां 1984 में स्थापित इंटर कालेज तो है लेकिन कायदे के भवन का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। मगर इंटर के बाद की पढ़ाई-लिखाई के लिए यहां के लोगों को पिथौरागढ़ दौड़ लगानी पड़ रही है। स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदा-कदा थल के डॉक्टर यहां आकर मरीजों का इलाज करते हैं।
इलाकेकी जनता डिग्री कालेज, जीआईसी भवन, कन्या जूनियर हाईस्कूल के उच्चीकरण, अस्पताल में स्थायी चिकित्सक की तैनाती, रोजगारपरक शिक्षा के लिए पालीटेक्निक अथवा आईटीआई खोलने की मांग करते-करते थक गई है। अब यहां के लोग इन मसलों को लेकर आंदोलन के मूड में हैं। मुवानी घाटी विकास संघर्ष समिति के कोषाध्यक्ष रामसिंह राठौर का कहना है कि मुवानी घाटी तीन विकासखंडों के एकदम पिछवाडे़ में होने का खामियाजा भुगत रहा है। मुवानी की बेरीनाग से दूरी 40 किलोमीटर, डीडीहाट से 35 एवं कनालीछीना ब्लाक से 30 किलोमीटर का फासला है। इसके चलते यहां के लोग पृथक ब्लाक की लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
उपजाऊ जमीन वाला यह इलाका अच्छी खेती ही नहीं बागवानी के लिए भी मशहूर है। ये इलाका आम, अमरूद, पपीता, केला और लीची की पैदावार के लिए जाना जाता है। मगर मार्केटिंग की समस्या काश्तकारों को फसल का दाम नहीं देती है।